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चंडीगढ़ में 15 साल पुरानी गाड़ियां हो गई कबाड़, अब कटेगा चालान
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 01 Apr 2017 09:30 AM IST
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पुरानी गाड़ियां हो गई कबाड़
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पहली अप्रैल से शहर में कोई भी 15 साल और इससे अधिक पुराना कॉमर्शियल डीजल वाहन नहीं चल सकेगा। स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) ऐसे वाहनों के चालान करेगी। एसटीए ने इन पुराने वाहनों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है। इस फैसले के बाद खुद प्रशासन के 600 वाहन बंद हो गए हैं। इनमें सीटीयू की बसें, फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां और कई विभागों की सरकारी गाड़ियां भी शामिल हैं। स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) ने पहले ही सभी डिपार्टमेंट्स को अपने पुराने वाहन बदलने का नोटिस जारी कर दिया था। जिस कारण अब 1 अप्रैल से चालान शुरू होंगे।
पहले 31 दिसंबर, 2016 से ही यह वाहन बंद किए जाने थे, लेकिन विभिन्न ट्रांसपोर्ट संगठनों के दबाव में प्रशासन ने यह फैसला 31 मार्च तक टाल दिया था। इस बार फैसला नहीं टाला गया। अभी तक चंडीगढ़ के ही दो हजार से अधिक ऐसे वाहन सड़कों पर दौड़ते रहे हैं। वहीं दूसरे प्रदेशों से आने वाले वाहनों की संख्या इससे अलग है। शनिवार से चंडीगढ़ ही नहीं दूसरे राज्यों के वाहनों पर भी पाबंदी होगी। अभी पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के सैकड़ों ऐसे वाहन रोजाना शहर में घूमते हैं। ऐसे में अब इन वाहनों पर पूर्ण तौर पर रोक लग जाएगी।
डीजल वाहन पेट्रोल की क्षमता में ज्यादा प्रदूषण उत्पन्न करते हैं। खासकर तब जब यह वाहन पुराने हो जाते हैं। 15 साल पुराने वाहन तो कई गुणा प्रदूषण उत्पन्न करते हैं। जिससे शहर की हवा में जहर घुलना शुरू हो जाता है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) इन वाहनों पर रोक लगाने के आदेश पहले ही जारी कर चुका है।
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शनिवार, एक अप्रैल से 15 साल और इससे अधिक पुराने कॉमर्शियल डीजल वाहन शहर में नहीं चल सकेंगे। कोई वाहन मिलता भी है तो उसका चालान किया जाएगा। सरकारी-प्राइवेट किसी तरह के वाहन को मंजूरी नहीं है।
- राजीव तिवारी, एडिशनल सेक्रेटरी, एसटीए।
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पहले 31 दिसंबर, 2016 से ही यह वाहन बंद किए जाने थे, लेकिन विभिन्न ट्रांसपोर्ट संगठनों के दबाव में प्रशासन ने यह फैसला 31 मार्च तक टाल दिया था। इस बार फैसला नहीं टाला गया। अभी तक चंडीगढ़ के ही दो हजार से अधिक ऐसे वाहन सड़कों पर दौड़ते रहे हैं। वहीं दूसरे प्रदेशों से आने वाले वाहनों की संख्या इससे अलग है। शनिवार से चंडीगढ़ ही नहीं दूसरे राज्यों के वाहनों पर भी पाबंदी होगी। अभी पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के सैकड़ों ऐसे वाहन रोजाना शहर में घूमते हैं। ऐसे में अब इन वाहनों पर पूर्ण तौर पर रोक लग जाएगी।
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डीजल वाहन पेट्रोल की क्षमता में ज्यादा प्रदूषण उत्पन्न करते हैं। खासकर तब जब यह वाहन पुराने हो जाते हैं। 15 साल पुराने वाहन तो कई गुणा प्रदूषण उत्पन्न करते हैं। जिससे शहर की हवा में जहर घुलना शुरू हो जाता है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) इन वाहनों पर रोक लगाने के आदेश पहले ही जारी कर चुका है।
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शनिवार, एक अप्रैल से 15 साल और इससे अधिक पुराने कॉमर्शियल डीजल वाहन शहर में नहीं चल सकेंगे। कोई वाहन मिलता भी है तो उसका चालान किया जाएगा। सरकारी-प्राइवेट किसी तरह के वाहन को मंजूरी नहीं है।
- राजीव तिवारी, एडिशनल सेक्रेटरी, एसटीए।