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आदेश का असर: वेतन कटौती का डर, तीन दिन में चंडीगढ़ निगम के 127 कर्मचारी ज्यादा दिखे ऑनलाइन
Wed, 05 May 2021 09:46 AM IST
निवेदिता वर्मा
नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 05 May 2021 09:46 AM IST
सार
आयुक्त केके यादव ने कहा कि व्यवस्था दुरुस्त करना है तो यह घड़ी पहनाना जरूरी है। एक मई से घड़ी पहनने की अनिवार्यता के बाद शनिवार को निगम के 2859 कर्मचारी ऑनलाइन दिखने लगे जो पहले 2732 ही थे।
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चंडीगढ़ नगर निगम
- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
चंडीगढ़ निगम के कर्मचारियों पर सदन के आदेश का असर दिखने लगा है। मात्र तीन दिन में 127 कर्मचारी ज्यादा ऑनलाइन दिखने लगे हैं। केवल एमओएच के ही 316 कर्मचारी अतिरिक्त ऑनलाइन दिखने लगे हैं। हालांकि अभी 1120 कर्मचारी ऑफलाइन दिख रहे हैं। सदन में फैसला लिया गया था कि मई माह से उन्हीं कर्मचारियों को वेतन मिलेगा जो स्मार्ट घड़ियां पहनेंगे।
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सदन में सफाई कर्मचारियों को स्मार्ट घड़ी न पहनने का प्रस्ताव लाया गया था। इस पर आयुक्त केके यादव ने कहा कि व्यवस्था दुरुस्त करना है तो यह घड़ी पहनाना जरूरी है। एक मई से घड़ी पहनने की अनिवार्यता के बाद शनिवार को निगम के 2859 कर्मचारी ऑनलाइन दिखने लगे जो पहले 2732 ही थे, वहीं 1120 ऑफलाइन दिखे जो पहले 1223 थे। इसके अलावा एमओएच में 1479 कर्मचारी ऑनलाइन दिख रहे थे, जो पहले 1163 थे। वहीं 712 ऑफलाइन थे, जो पहले 1002 थे।
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वर्तमान में निगम के कुल 3979 कर्मचारियों के पास घड़ी है। इसमें से 21 घड़ियां खराब हैं। इससे पहले 45 घड़ियां खराब थीं। सबसे ज्यादा एमओएच के 2191 कर्मचारियों के पास घड़ियां हैं। निगम ने कंपनी से कुल 4 हजार घड़ियां किराए पर ली हैं। हर माह इसका 18 लाख रुपये किराया जाता है। तीन साल के इस अनुबंध के खिलाफ सफाई कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी थी। उसके बाद से सफाई कर्मचारियों को मैनुअल ही वेतन दिया जा रहा था।
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विवाद के बाद कराया सर्वे, बढ़ गई थी कार्य क्षमता
स्मार्ट घड़ी पहनने के बाद चंडीगढ़ नगर निगम के कर्मचारियों की कार्यक्षमता में 67 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई थी। निगम और सूक्ष्मजीव प्रौद्योगिकी संस्थान (इमटेक) के सामूहिक सर्वे में सामने आया था कि प्रत्येक छह घंटे बाद कर्मचारियों की कार्यक्षमता क्षेत्रवार पहले की तुलना में बढ़ गई है। स्मार्ट घड़ी पर विवाद के बाद निगम ने इमटेक के साथ घड़ी पहनने वाले कर्मचारियों का क्षेत्रवार सर्वे कराया था। यह सर्वे अगस्त, सितंबर और अक्तूबर में किया गया था।
कमेटी ने कुछ देखे बिना ही कह दिया, अब घड़ी की जरूरत नहीं
स्मार्ट घड़ी को लेकर कर्मचारियों की हड़ताल के बाद तत्कालीन मेयर ने एक कमेटी बना दी थी, जिसे तय करना था कि कर्मचारी घड़ी पहनेंगे या नहीं। 6 माह तक कमेटी कोई निर्णय ही नहीं ले सकी। इधर, बिना घड़ी के उपयोग किए निगम 18 लाख रुपये महीने कंपनी को भुगतान करती रही। ऑडिट आपत्ति के बाद कमेटी ने आनन फानन में बैठक कर घड़ी के फायदे व नुकसान जाने बिना ही कर्मचारियों को घड़ी न पहनने की रिपोर्ट बना दी। इसे सदन ने अस्वीकार कर दिया।
कमेटी ने कुछ देखे बिना ही कह दिया, अब घड़ी की जरूरत नहीं
स्मार्ट घड़ी को लेकर कर्मचारियों की हड़ताल के बाद तत्कालीन मेयर ने एक कमेटी बना दी थी, जिसे तय करना था कि कर्मचारी घड़ी पहनेंगे या नहीं। 6 माह तक कमेटी कोई निर्णय ही नहीं ले सकी। इधर, बिना घड़ी के उपयोग किए निगम 18 लाख रुपये महीने कंपनी को भुगतान करती रही। ऑडिट आपत्ति के बाद कमेटी ने आनन फानन में बैठक कर घड़ी के फायदे व नुकसान जाने बिना ही कर्मचारियों को घड़ी न पहनने की रिपोर्ट बना दी। इसे सदन ने अस्वीकार कर दिया।
सदन के निर्णय के बाद कुछ लोगों ने घड़ी पहनी है। कुछ अब भी मना कर रहे हैं। वेतन सदन के फैसले के अनुसार घड़ी पहनने वाले को ही मिलेगा। हां कोई घड़ी खराब है या समस्या है तो उसका निराकरण किया जा रहा है। -केके यादव, निगम आयुक्त