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सचिव जी बर्खास्त : वित्तीय अनियमितता के कारण पंचायत सचिव की सेवा समाप्त; कहां-क्या हुआ?

Thu, 07 May 2026 05:08 PM IST
सारण ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोपालगंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोपालगंज Published by: सारण ब्यूरो Updated Thu, 07 May 2026 05:08 PM IST
सार

गोपालगंज में भ्रष्टाचार के आरोप में बड़ी कार्रवाई करते हुए डीएम पवन कुमार सिन्हा ने भोरे के तत्कालीन पंचायत सचिव अभय कुमार गुप्ता को सेवा से बर्खास्त कर दिया। विभागीय जांच में वित्तीय अनियमितता और सरकारी राशि में गड़बड़ी के आरोप सही पाए गए।

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Major action on financial irregularities and negligence, Panchayat Secretary Abhay Kumar Gupta dismissed
जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

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बिहार के गोपालगंज जिले में भ्रष्टाचार और सरकारी कार्यों में लापरवाही बरतने वाले कर्मियों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। ताजा मामले में जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भोरे प्रखंड के तत्कालीन पंचायत सचिव अभय कुमार गुप्ता को सरकारी सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया है। इस कार्रवाई के बाद जिला प्रशासन और प्रखंड कार्यालयों में हड़कंप मच गया है।

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क्या है पूरा मामला?
पंचायत सचिव अभय कुमार गुप्ता पर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में गंभीर वित्तीय अनियमितता और पद के दुरुपयोग के आरोप लगे थे। भोरे के प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा की गई जांच में पाया गया कि पंचायत सचिव ने विकास योजनाओं की राशि में हेराफेरी की और सरकारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए वित्तीय गड़बड़ी की।

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निलंबन के बाद हुई बर्खास्तगी
आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अभय कुमार गुप्ता को पहले ही निलंबित कर दिया गया था। निलंबन अवधि के दौरान विभागीय जांच कराई गई, जिसमें उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सही पाए गए। जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने उन्हें सेवा में बने रहने के अयोग्य मानते हुए तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया।

भ्रष्ट कर्मियों को सख्त संदेश
जिला प्रशासन की इस कार्रवाई से साफ संकेत मिला है कि जनता के पैसे के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार में लिप्त किसी भी सरकारी कर्मी को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन के इस फैसले के बाद जिले के अन्य सरकारी कर्मचारियों में भी सतर्कता बढ़ गई है। जानकारों का मानना है कि यह कार्रवाई जिले में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।

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