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Bihar : नीट छात्रा मामले में नहीं मिल पाई अब तक सफलता, ऐसे मामलों में क्यों पिछड़ जाते हैं परिजन? जानिए हर पहलू

Tue, 07 Apr 2026 08:15 PM IST
Krishan Ballabh Narayan Krishan Ballabh Narayan
Updated Tue, 07 Apr 2026 08:15 PM IST
सार

Bihar : तीन महीने गुजर गए लेकिन एक छात्रा की संदिग्ध मौत का खुलासा अब तक नहीं हो पाया। यह मौत है या हत्या यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया, जबकि इस मामले की जांच में बिहार पुलिस और एसआईटी के बाद सीआईडी भी जुटी हुई है। परिजन हताश हो रहे हैं।

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Bihar Police SIT and CBI failed in NEET student murder case jahanabad patna bihar news
जांच में जुटी सीबीआई के हाथ अब तक खाली - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नीट की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा 5 जनवरी की दोपहर को अपने घर से पटना स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल आई थी। 6 जनवरी को तारीख़ को बेहोश की हालत में उसे डॉक्टर सहजानंद के यहां ले जाया गया। डॉक्टर सहजानंद के क्लिनिक पर आईसीयू की सुविधा नहीं होने के कारण उन्होंने उसे रेफर कर दिया, जिसके बाद बेहोश छात्रा को पटना के ही प्रभात मेमोरियल हीरामती हॉस्पिटल ले जाया गया। इस संबंध में छात्रा के मामा का बयान सामने आया था कि "7 जनवरी को हम लोग बच्ची के हॉस्टल में उसका कमरा देखने गए लेकिन वहां पोछा लगाकर सब कुछ साफ सुथरा कर दिया था। इलाज के दौरान 8 जनवरी की शाम 6 बजे से 10 बजे तक होश में आई जिसमें उसने इशारे से अपने परिजनों को कुछ बताया। परिजनों का कहना था कि उसने इशारों में ही बताया था कि उसके साथ गलत हुआ है। परिजनों का आरोप है कि हम लोगों को अस्पताल वालों ने बच्ची का कोई भी बयान मोबाइल से रिकार्ड करने नहीं दिया। उनलोगों ने हमलोगों के साथ दुर्व्यवहार भी किया। साथ ही उनका यह भी कहना था कि प्रभात मेमोरियल के ही एक डॉक्टर ने परिजनों से कहा कि आपकी बच्ची के साथ गलत हुआ है, जिसके बाद परिजनों ने 9 जनवरी को चित्रगुप्त नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज़ कराई। प्राथमिकी में इस बात का उल्लेख किया गया था कि बेटी के साथ शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश की गई। विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई, जिस वजह से उसके शरीर और सिर पर चोट के निशान देखे गए थे। इलाज से असंतुष्ट परिवार ने छात्रा को 10 जनवरी को प्रभात मेमोरियल अस्पताल से ले जाकर मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान 11 जनवरी की दोपहर छात्रा की मौत हो गई।

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पुलिस की किरकिरी 
13 जनवरी को पटना पुलिस ने एक प्रेस वार्ता जारी करते हुए कहा कि, " स्त्री रोग चिकित्सक की जांच में यौन हिंसा की पुष्टि नहीं हुई है। 8 जनवरी को छात्रा के यूरीन में नींद की गोलियों का डोज़ पाया गया और छात्रा के मोबाइल की सर्च हिस्ट्री में 24 दिसंबर को सुसाइड और 5 जनवरी को नींद की दवा के संबंध में सर्च किया गया था। इस प्रेसवार्ता के बाद पटना पुलिस कीम खूब किरकिरी हुई। 
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट से जगी आस 
15 जनवरी को एम्स और पीएमसीएच में हुए पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि कर दी कि रिपोर्ट यौन हिंसा से इनकार नहीं कर रही है। इस रिपोर्ट में छात्रा के शरीर पर लगभग 10 से अधिक जख्मों की भी चर्चा की गई। पोस्टमोर्टम रिपोर्ट आने के बाद पटना पुलिस की थ्योरी को ही झूठा साबित कर दिया, जिससे पटना पुलिस की जमकर किरकिरी हुई। तब पुलिस ने किरकिरी के दवाब में गर्ल्स हॉस्टल के मकान मालिक को गिरफ्तार कर लिया। 
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एसआईटी ने भी किया परेशान 
डीजीपी विनय कुमार ने पटना एसएसपी को इस केस से अलग करते हुए सेंट्रल रेंज पटना के पुलिस महानिरीक्षक जितेंद्र राणा के नेतृत्व में एक एसआईटी का गठन किया। लेकिन परिजनॉन को एसआईटी की जांच से भी संतुष्टि नहीं मिली। उनके असंतुष्ट होने के पीछे का कारण परिजनों ने अनगिनत सदस्यों की डीएनए जांच थी। परिजनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि एसआईटी सिर्फ हमारे परिवार और हमारे संबंधियों की ही डीएनए जांच करा रही है। परिणाम कुछ नहीं निकला और मामला जस का तस रह गया। हालांकि एसआईटी को कुछ कपड़े भी मिले थे और टीम की कार्रवाई के दौरान दो पुलिसकर्मियों सस्पेंड भी किए गए थे। 

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राजनीति भी खूब गरमाई
इस घटना को लेकर राजनीति भी खूब हुई। पक्ष से लेकर विपक्ष तक। विपक्ष ने भी इस घटना पर दुःख व्यक्त करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मां की। वहीं जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर भी जहानाबाद जाकर परिजनों से मुलाक़ात की। इस दौरान प्रशांत किशोर ने मामले की नई सिरे से जांच करने की मांग की।  इतना ही नहीं परिजन के दवाब पर सरकार झुकी और मामले को सीबीआई को सौंपा गया। इस संबंध में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी कहा था कि अब मामले की जांच सीबीआई करेगी, जिसकी जांच प्रक्रिया में सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा था कि सीबीआई एक पूरी तरह स्वतंत्र संस्था है और वह अपने तरीके से साक्ष्य जुटाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी हो ताकि दोषियों को कड़ी सजा मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि हमारा एकमात्र लक्ष्य पीड़ित परिवार को मानसिक और कानूनी न्याय दिलाना है।
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सीबीआई से भी मिली निराशा 
इस बीच बिहार विधान सभा चुनाव होने था इसलिए मामले को सीबीआई के हाथों सौंप दिया गया। मामला सीबीआई के हाथ में जाते ही सीबीआई जहानाबाद से पटना तक खूब मैराथन दौड़ लगाई। चर्चाएं खूब हुई कि अब मामला खुल जाएगा। आज खुलेगा, कल खुलेगा, लेकिन मामला अब तक वाही ढाक के तीन पात बनकर रह गए।

डीजीपी पर भड़के परिजन, कहा- सब बिके हुए हैं
30 जनवरी की शाम डीजीपी विनय कुमार ने परिजन को अपने आवास पर बुलाया था। लेकिन मुलाकात के बाद परिजन बेहद नाराज होकर वहां से निकले। पीड़िता की मां वहां से रोते हुए बहार निकली और कहा कि, “मेरी बेटी को कोई न्याय नहीं दिलवा पा रहा है। सबको गड्डी मिली है। डीएसपी,एसपी सब बिके हुए हैं। हम गड्डी नहीं दे पा रहे हैं, इसलिए हमारी सुनवाई नहीं हो रही।” पीड़िता की मां ने आगे कहा कि डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी हमें बुला रहे हैं, लेकिन उनसे मिलकर क्या होगा? हमें सिर्फ न्याय चाहिए। फिर 4 फरवरी को मुख्यालय में प्रेसवार्ता जारी की गई, लेकिन साथ में गर्ल्स हॉस्टल हत्याकांड का सच बताने के लिए IPRD कार्ड की मांग की गई, लेकिन इसके बाद भी पुलिस  मीडिया को जवाब नहीं दे सकी। 

एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया, लेकिन किसी ने नहीं पूछा हाल 
इस बीच 29 मार्च 2026 को परिजनों ने गर्दनीबाग में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया, लेकिन अफ़सोस न तो कोई सत्ता पक्ष से उनको पूछने आया और न ही विपक्ष से। परिजन के वकील का आरोप पुलिस प्रशासन से लेकर सरकार तंत्र और पूरा सिस्टम इस मामले की लीपापोती करने में लगा हुआ है। छात्रा की मां अब बस यही कह रही है कि अब बस एक आस न्यायपालिका पर है, जिसके लिए कोर्ट के लेकर सड़क तक न्याय की भीख मांग रहे हैं। जब तक आस रहेगी तब लड़ेंगे नहीं तो मर जाएंगे। 
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