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Bihar Flood: गंगा-सोन नदी में उफान से पटना के एक दर्जन गांव डूबे, फौजियों के गांव में घुसा पानी; भयावह हालात
Wed, 06 Aug 2025 08:17 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Wed, 06 Aug 2025 08:17 PM IST
सार
Bihar Flood: लोगों का कहना है कि हर साल बाढ़ आती है, लेकिन स्थानीय प्रशासन की ओर से समय पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। ग्रामीणों ने चेताया है कि अगर प्रशासन ने जल्द राहत और बचाव कार्य नहीं शुरू किया, तो आक्रोश और विरोध प्रदर्शन के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं बचेगा।
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पटना में बाढ़ ने बिगाड़े हालात
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गंगा और सोन नदियों के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि ने पटना जिले के दियारा और निचले इलाकों में भारी तबाही मचा दी है। पानी के तेज बहाव और बढ़ते जलस्तर के चलते दानापुर, मनेर, फतुहा, बख्तियारपुर, दनियावां, खुशरूपुर समेत कई इलाकों के एक दर्जन से ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। गांवों का संपर्क शहरी क्षेत्रों से कट चुका है और जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है।
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मनेर के रतन टोला में घरों तक पहुंचा बाढ़ का पानी
सबसे अधिक संकट की स्थिति मनेर के रतन टोला गांव में उत्पन्न हुई है, जिसे फौजियों का गांव कहा जाता है। यहां के कई घरों में गंगा और सोन के पानी ने दस्तक दे दी है। गांव के लोग ऊंचे स्थानों और मंदिरों में शरण लेने को मजबूर हो गए हैं। मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था भी लोगों को जान जोखिम में डालकर करनी पड़ रही है।
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गांव के लोगों की ओर से पंचायत के मुखिया मैनेजर सिंह और समाजसेवी प्रमोद कुमार ने मनेर प्रखंड और अंचल अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया है। उन्होंने गांव में नाव चलवाने की मांग की है ताकि आवाजाही का कोई सुरक्षित विकल्प बन सके।
एक दर्जन से अधिक गांव डूबे, सड़कें जलमग्न
बाढ़ से महावीर टोला छिहत्तर, हल्दी छपरा, बदल टोला, दुधेला, मुंजी टोला, सात आना, धजव टोला, नया टोला, इस्लामगंज और अदल चक जैसे गांवों में भी पानी घुस चुका है। इन गांवों में न सिर्फ घरों में पानी भरा है बल्कि सड़कें भी पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं, जिससे लोगों का संपर्क शहर से टूट गया है।
लोग किसी तरह जरूरी सामान खरीदने के लिए बाढ़ के पानी में पैदल चलकर बाजार तक पहुंच रहे हैं और अंधेरा होने से पहले घर लौटने को मजबूर हैं। स्थिति इतनी विकट है कि बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नाव तक की व्यवस्था नहीं
बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों का प्रशासन से भरोसा उठता जा रहा है। दियारा इलाकों में अब तक नाव की व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे लोगों में गहरा रोष है। लोगों का कहना है कि हर साल बाढ़ आती है, लेकिन स्थानीय प्रशासन की ओर से समय पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। ग्रामीणों ने चेताया है कि अगर प्रशासन ने जल्द राहत और बचाव कार्य नहीं शुरू किया, तो आक्रोश और विरोध प्रदर्शन के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं बचेगा।
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डर के साए में जी रहे दियारावासी
नदियों के लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए दियारावासी बेहद डरे और सहमे हुए हैं। ग्रामीणों को यह भय सता रहा है कि कहीं आने वाले दिनों में स्थिति और ज्यादा खराब न हो जाए। प्रशासन की ओर से अब तक कोई राहत शिविर, नाव सेवा या जरूरी मदद नहीं पहुंचाई गई है। अगर जल्द उपाय नहीं किए गए, तो यह बाढ़ एक बड़ी मानवीय त्रासदी में बदल सकती है।