वैशाली में गंगा के बढ़ते जलस्तर और पिछले दो दिनों से हो रही लगातार तेज बारिश के कारण वैशाली जिले के राघोपुर प्रखंड में बाढ़ की स्थिति विकराल होती जा रही है। पानी का स्तर तेजी से बढ़ रहा है और अब यह प्रखंड के कई हिस्सों में फैल चुका है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि थाने परिसर तक में बाढ़ का पानी घुस चुका है और 32 विद्यालयों को बंद कर दिया गया है।
Bihar Flood: राघोपुर में गंगा उफान पर, बाढ़ के कारण 32 स्कूल बंद... थाना भी जद में; गांवों का संपर्क टूटा
Bihar Flood: प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी आनंद प्रकाश ने बताया कि बाढ़ की स्थिति को देखते हुए राघोपुर प्रखंड के 32 स्कूलों को बंद कर दिया गया है। राघोपुर के कई इलाकों में मकई और जनेरा की फसलें पानी में डूब गई हैं। पशुपालकों को चारा लाने और मवेशियों की देखभाल में कठिनाई हो रही है।
सड़कों पर चार फीट तक पानी, टूटी संपर्क व्यवस्था
जानकारी के मुताबिक, राघोपुर प्रखंड के गोकुलपुर पुलिया से लेकर फतेहपुर घाट जाने वाली सड़क, रामपुर श्यामचंद से मीरमपुर, रूस्तमपुर से वीरपुर, जुड़ावनपुर बरारी, शिवनगर बिंदा मार्केट और सिक्स लेन पुल के पाया नंबर 29 से 55 तक की सड़कें पानी में डूब चुकी हैं। सिक्स लेन पुल के पाया नंबर 29 के पास निर्माण कंपनी द्वारा बनाई गई सड़क पानी के तेज बहाव से बह गई है, जिससे जाफराबाद और जहांगीरपुर का संपर्क मुख्य सड़क से पूरी तरह कट गया है।
यह भी पढ़ें- Bihar Flood: मुंगेर में बाढ़ का कहर, डूबने से दो लोगों की मौत; एक बच्ची की हालत गंभीर
जान जोखिम में डालकर हो रहा आवागमन
प्रखंड के अधिकांश ढाब पानी से भर गए हैं, जिससे लोगों का आना-जाना मुश्किल हो गया है। रामपुर भट्ठी वार्ड नंबर 1 के पास के इलाकों में लोग केले के थम और ट्यूब का सहारा लेकर एक ओर से दूसरी ओर जा रहे हैं। सड़कों पर पानी भरने के कारण दोपहिया और तिपहिया वाहनों का आवागमन भी लगभग ठप है।
स्कूलों पर भी बाढ़ का असर
प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी आनंद प्रकाश ने बताया कि बाढ़ की स्थिति को देखते हुए राघोपुर प्रखंड के 32 स्कूलों को बंद कर दिया गया है। इनमें यूएचएस चक सिंगार, उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय जुड़ावनपुर बरारी, पृथ्वी सिंह हाई स्कूल जहांगीरपुर, एनपीएस राघोपुर डोम टोली, जीपीएस पुरुषोत्तमपुर सहित कई प्राथमिक, मध्य और उच्च विद्यालय शामिल हैं।
कृषि को बड़ा नुकसान, मवेशियों की देखरेख बनी चुनौती
राघोपुर के कई इलाकों में मकई और जनेरा की फसलें पानी में डूब गई हैं। पशुपालकों को चारा लाने और मवेशियों की देखभाल में कठिनाई हो रही है। ढाबों में पानी भर जाने से खेतों तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है। निचले इलाकों में रहने वाले लोग ऊंचे स्थानों की ओर पलायन की तैयारी कर रहे हैं।
नाव तक नहीं उपलब्ध, प्रशासनिक मदद का इंतजार
बाढ़ प्रभावित इलाकों में अभी तक प्रशासन की ओर से नाव जैसी बुनियादी सुविधा भी नहीं पहुंचाई गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार निवेदन के बावजूद किसी प्रकार की राहत या मदद नहीं मिल पाई है।
यह भी पढ़ें- Bihar Flood: बारिश आई...आफत लाई, अरमा गांव के महादलित मोहल्लों में जलजमाव; छत पर रात गुजारने को मजबूर लोग