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Bihar Politics: जदयू-भाजपा के रिश्ते सवालों के घेरे में, फिर 'ताकत' पाने की तैयारी में नीतीश की पार्टी
Sat, 06 Aug 2022 03:22 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Sat, 06 Aug 2022 03:22 PM IST
सार
जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने बीते दिनों कुछ मीडिया संस्थानों से चर्चा में संकेत दिए थे कि उनकी पार्टी राज्य में फिर अपनी नंबर-1 की स्थिति पाना चाहती है। 2020 के चुनाव में जदयू 43 पर सिमट गई।
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जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
बिहार में सत्तारूढ़ जदयू और भाजपा गठबंधन के बीच सब कुछ ठीकठाक नहीं चल रहा है। दोनों सहयोगी दलों के रिश्ते सवालों के घेरे में हैं, क्योंकि जदयू का शीर्ष नेतृत्व राज्य में पार्टी को फिर सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में वापस लाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।
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जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने बीते दिनों कुछ मीडिया संस्थानों से चर्चा में संकेत दिए थे कि उनकी पार्टी राज्य में फिर अपनी नंबर-1 की स्थिति पाना चाहती है। इसलिए वह 2020 के विधानसभा चुनाव में मिली विफलता को दूर करने की दिशा में काम कर रही है।
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2020 के चुनाव में जदूय के खिलाफ साजिश हुई?
ललन सिंह का मानना है कि 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में जदयू के खिलाफ साजिश हुई थी। उनका इशारा चिराग पासवान की ओर था। चिराग तब लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख थे। उन्होंने सभी जदयू प्रत्याशियों के खिलाफ अपनी पार्टी के उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। चिराग के प्रत्याशियों में से कई भाजपा के बागी थे। इस चुनाव में सीएम नीतीश कुमार की पार्टी को मात्र 43 सीटों पर जीत मिली, जबकि इसके पांच साल पहले जदयू ने 71 सीटें जीती थी। 2020 के चुनाव में जदयू सिमट गई थी, जबकि लालू यादव की राजद सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी। भाजपा दूसरे नंबर पर रही थी।
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बिहार की बाढ़ में डूब जाएगी एनडीए की नाव : तिवारी
बहरहाल, जदयू नेता के उक्त बयान से राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बिहार में चाय की प्याली में तूफान ला दिया है। राजद के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने चुटकी लेते हुए कहा कि बिहार एनडीए में बड़े मुश्किलभरे हालात हैं। एनडीए की नाव बरसात के मौसम में आने वाली 'बाढ़' में डूब जाएगी। तिवारी का कहना है कि नीतीश कुमार समाजवादी पृष्ठभूमि के नेता हैं, वे भाजपा के हिंदुत्व के एजेंडे से तालमेल नहीं बना सकेंगे।
तेजस्वी यादव में दिख रही उम्मीद
तिवारी से जब यह पूछा गया कि क्या जदयू और राजद के बीच एक और पुनर्गठन की संभावना दिख रही है? दोनों दलों ने 2015 के विधानसभा चुनावों से पहले हाथ मिला लिया था और दो साल बाद अलग हो गए थे। तिवारी ने कहा कि वह केवल इतना कह सकते हैं कि बिहार को एक समाजवादी सरकार की जरूरत है। यह जल्द ही मिलेगी और लोगों को राजद नेता तेजस्वी यादव में नई उम्मीद दिख रही है। हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी कि ऐसी सरकार का गठन कब होगा।
'कल किसने देखा?
भाजपा के 2024 का लोकसभा चुनाव तथा 2025 का विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ने के दावे पर ललन सिंह ने कहा था, 'कल किसने देखा? फिलहाल हम पार्टी को फिर से नंबर-1 बनाने के लिए काम कर रहे हैं। 2024 और 2025 अभी दूर हैं। ललन सिंह ने कहा कि हमें पिछले विधानसभा चुनावों में एक साजिश के कारण खोई हुई जमीन को फिर से हासिल करना होगा।
भाजपा कर रही बेवजह की बातें : नीरज कुमार
उधर, जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि उनकी पार्टी का रुख स्पष्ट है। वे भाजपा की बेवजह की बातों को देखकर हैरान हैं। अभी 2022 चल रहा है। 2024 और 2025 पर चर्चा करने का क्या मकसद है? एनडीए में नीतीश कुमार के नेतृत्व पर कभी सवाल नहीं उठे। भाजपा ऐसे दावे क्यों कर रही है जिनकी कोई जरूरत नहीं है।