बिहार में बाढ़ का खतरा: नेपाल से प्रलय रात में ही पहुंच रहा बिहार; किस समय तक आएगा, बचाव की तैयारी देखें
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Wed, 26 Aug 2026 08:10 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
Updated Wed, 26 Aug 2026 08:10 PM IST
खास बातें
गंडक नदी में अचानक जलप्रवाह बढ़ने और करीब तीन मीटर ऊंची बाढ़ की लहर आने की संभावना के मद्देनजर बिहार में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अपनी सभी यूनिट्स को अलर्ट कर दिया है। नेपाल के रसुवा जिले में बाढ़ में करीब 400 लोगों के बह जाने की खबर है। इसमें कम से कम 105 भारतीय और 37 एनआरआई शामिल हैं।बाढ़ और बारिश से जुड़े हर एक बड़े अपडेट के लिए जुड़े रहिए अमर उजाला के लाइव ब्लॉग के साथ
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बिहार में बाढ़ का खतरा
- फोटो : अमर उजाला
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लाइव अपडेट
10:16 PM, 26-Aug-2026
बिहार: माइकिंग कराकर 5000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया
बैठक में जिलाधिकारी, पश्चिमी चंपारण ने बताया कि संभावित फ्लैश फ्लड के मद्देनजर तटबंध के आसपास के इलाकों में माइकिंग कराकर पांच हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है। साथ ही अब तक जिले मे संचालित 7 कम्युनिटी किचन के माध्यम से 1,150 से अधिक लोगों को भोजन कराया गया।अन्य जिलों के जिला पदाधिकारियों के द्वारा भी अपनी तैयारियों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। उनके द्वारा बताया गया कि वर्तमान में स्थिति सामान्य है परंतु जलस्तर के बढ़ने की स्थिति में लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थान पर ले जाने की व्यवस्था कर ली गई है। राहत केंद्रों एवं कम्युनिटी किचन स्थलों को चिन्हित कर लिया गया है तथा चिकित्सीय दल को भी राहत केंद्रों/कम्युनिटी किचन स्थल के साथ टैग कर दिया गया है। साथ ही जिलाधिकारियों ने बताया कि चौकीदारों तथा होमगार्ड जवानों के द्वारा तटबंधों की सतत निगरानी की जा रही है।
10:15 PM, 26-Aug-2026
शाम को मुख्य सचिव ने की समीक्षा बैठक की
गंडक नदी के आसपास के जिलों में फ्लैश फ्लड की स्थिति एवं तैयारियों की मुख्य सचिव ने समीक्षा बैटक की है। शाम 7:30 बजे मुख्य सचिव के द्वारा वीसी के माध्यम से मुजफ्फरपुर, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण एवं वैशाली के जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक के साथ तैयारियों की समीक्षा की गई।मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को SOP के अनुरूप सभी आवश्यक तैयारियां समयबद्ध रूप से पूर्ण रखने तथा संभावित फ्लैश फ्लड की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी राहत एवं बचाव सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में सतत निगरानी रखने, आवश्यकतानुसार राहत सामग्री एवं अन्य संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा संबंधित विभागों के साथ प्रभावी समन्वय बनाए रखने को कहा।
मुख्य सचिव ने जिला प्रशासन के वरीय पदाधिकारियों तथा जल संसाधन विभाग के अभियंताओं को रातभर स्थिति पर निरंतर निगरानी रखते हुए अलर्ट मोड में रहने के निदेश दिए। तटबंधों की निगरानी हेतु चौकीदारों एवं होमगार्ड के जवानों के माध्यम से लगातार पैट्रोलिंग करने के निदेश दिए। साथ ही NDRF एवं SDRF टीमों को भी अलर्ट मोड पर रहने के निदेश दिए गए ताकि आवश्यकता पड़ने पर लोगों को त्वरित गति से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।
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08:09 PM, 26-Aug-2026
गंडक नदी के इन इन क्षेत्र पर बना खतरा
गोपालगंज जिले में गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ के खतरे से कुल 6 तटीय प्रखंडों की 62 पंचायतें सबसे अधिक संवेदनशील और प्रभावित क्षेत्र के रूप में चिन्हित की गई हैं। इसमें सदर, कुचायकोट, मांझा, बैकुंठपुर, बरौली और सिधवलिया शामिल हैं। पूर्वी चंपारण जिले के गंडक नदी और उससे जुड़े संभावित बाढ़/फ्लैश फ्लड के खतरे से मुख्य रूप से अरेराज,केसरिया और संग्रामपुर प्रखंड सबसे संवेदनशील और प्रभावित क्षेत्र माने जाते हैं। सबसे ज्यादा पश्चिम चंपारण जिले से है मुख्य रूप से पिपरासी, भितहा, ठकराहां, सिधुआं, बगहा, नौतन, योगापट्टी, मधुबनी, बैरिया और लौरिया प्रखंड प्रभावित संवेदनशील हैं।वैशाली जिले में गंडक के बढ़ते जलस्तर से मुख्य रूप से लालगंज,हाजीपुर, राघोपुर प्रखंड प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों में आते हैं।जबकि मुजफ्फरपुर जिले के पारू, सरैया और साहेबगंज मुख्य से शामिल है।
07:55 PM, 26-Aug-2026
कोसी नदी के जलस्तर में बड़े बदलाव की संभावना नहीं
भीमनगर कोसी बराज से शाम 06 बजे 01 लाख 31 हजार 340 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है। जबकि नेपाल के बराह क्षेत्र में शाम 06 बजे 95 हजार 450 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज रिकॉर्ड हुआ है। फिलहाल कोसी नदी के जलस्तर में बड़े बदलाव की संभावना नहीं है।07:34 PM, 26-Aug-2026
रसुवागढ़ी सीमा शुल्क कार्यालय के 14 कर्मचारी लापता
नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी की भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। रसुवागढ़ी सीमा शुल्क कार्यालय के 14 कर्मचारी लापता हैं, जबकि 25 कर्मचारी सुरक्षित हैं। लापता लोगों की तलाश के लिए सेना, पुलिस और हेलीकॉप्टरों की मदद से युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया।
07:30 PM, 26-Aug-2026
गंडक नदी में बाढ़ की आशंका से बरौली प्रखंड में अलर्ट
नेपाल से गंडक नदी में तीन लाख क्यूसेक से अधिक पानी आने की सूचना के बाद बरौली प्रखंड प्रशासन ने नदी के तटबंध के समीप और तटबंध के भीतर निचले इलाकों में रहने वाले दियारा वासियों को अलर्ट किया है। प्रशासन ने लोगों से अगले 48 घंटे तक विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। साथ ही तटबंध के उस पार नदी की ओर जाने से बचने को कहा गया है। अधिकारियों की टीम ने देवापुर पंचायत से लेकर हसनपुर पंचायत तक तटबंध के समीप बसे गांवों का जायजा लिया। इस दौरान ग्रामीणों को नदी के जलस्तर में वृद्धि की आशंका को लेकर सावधान किया गया।
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06:37 PM, 26-Aug-2026
NDRF की नौ टीमें तैनात
NDRF के IG नरेंद्र सिंह बुंदेला ने बताया कि एहतियात के तौर पर बिहार के पश्चिमी चंपारण और मुजफ्फरपुर में NDRF की टीमें तैनात की गई हैं। अभी बिहार में कुल नौ टीमें तैनात हैं और स्थिति पर बारीकी से नज़र रखी जा रही है।
06:35 PM, 26-Aug-2026
नेपाल टूरिज़्म बोर्ड ने मदद के लिए जारी किए नंबर
नेपाल टूरिज़्म बोर्ड ने भी मदद के लिए कुछ नंबर जारी किए हैं, जिनमें टोल-फ्री इमरजेंसी नंबर 1234, हॉटलाइन 1144 और टूरिस्ट पुलिस का नंबर 9851289445 शामिल है। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ ने नुवाकोट में बेत्रावती को रसुवा में रसुवागढ़ी बॉर्डर क्रॉसिंग से जोड़ने वाली 42 किलोमीटर लंबी सड़क को बहा दिया। अखबार ने सड़क विभाग के डिप्टी डायरेक्टर जनरल और प्रवक्ता शुभराज न्यूपाने के हवाले से बताया कि बाढ़ के पानी ने कई जगहों पर सड़क को नष्ट कर दिया और कई कंक्रीट के पुलों को बहा दिया। नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRM) ने एक बयान में रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, चितवन और गोरखा में नदी के किनारे रहने वाले लोगों से कहा है कि वे हाई अलर्ट पर रहें और अगली सूचना तक सुरक्षा उपाय अपनाएं।
05:59 PM, 26-Aug-2026
सशस्त्र सीमा बल ने सभी यूनिट्स को किया अलर्ट
सशस्त्र सीमा बल (SSB) के अधिकारियों ने बताया कि नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ के बाद सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने 1,751 किलोमीटर लंबी भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अपनी सभी यूनिट्स को अलर्ट कर दिया है। उन्होंने बताया कि सीमावर्ती इलाकों में राहत और बचाव कार्य शुरू करने के लिए बल की 18 टीमों को तैनात किया गया है, जिनमें से सात टीमें स्टैंडबाय पर हैं। अधिकारियों ने बताया कि कोसी और नारायणी नदी बेसिन में पानी का बहाव बढ़ने और नेपाल की छोटी नदियों में अचानक बाढ़ आने की आशंका के बीच SSB ने यह अलर्ट जारी किया है। उन्होंने कहा कि अर्धसैनिक बल उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में घाघरा/करनाली और महाकाली नदी के किनारे बसे संवेदनशील जिलों पर भी नजर रख रहा है। तिब्बत से सटे नेपाल के रसुवा जिले में अचानक आई भीषण बाढ़ से गांवों के बह जाने और जरूरी बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने के बाद लापता हुए लगभग 400 लोगों में कम से कम 105 भारतीय और 37 NRI शामिल हैं।
05:20 PM, 26-Aug-2026
जल संसाधन विभाग अलर्ट
तिब्बत में बादल फटने से हुई तबाही के बाद गंडक नदी में आने वाली संभावित बाढ़ को लेकर जलसंसाधन विभाग अलर्ट है। वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज के सभी 36 गेट खोले गए हैं। गंडक बराज पर अधिकारियों की टीम तैनात कर दी गई है। मुख्य सचिव ने संबंधित जिलाधिकारियों को आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं। तिब्बत में बुधवार की सुबह बादल के फटने के कारण तिब्बत से निकलने वाली और नेपाल से होकर भारत में आने वाली भोटे-कोशी नदी में लगभग 3 मीटर तक का सैलाब उठ रहा है।
नेपाल से होकर आने वाले पानी के सैलाब से गंडक नदी में अचानक जल स्तर बढ़ने की संभावना है। इसको देखते हुए जल संसाधन विभाग ने अलर्ट घोषित कर दिया है। दोपहर 12.00 बजे वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज से 86,000 क्यूसेक पानी आया है। इसके और बढ़ने की संभावना है। नेपाल में नारायणी नदी का देवघाट गेज स्थल पर वर्तमान जलस्तर 4.77 मीटर है। इस स्थल पर खतरे का निशान 9 मीटर है। चेतावनी स्तर 7.30 मीटर है। यहां नदी में पानी बढ़ने पर गंडक बराज तक पहुंचने में लगभग 3.50 घंटे का समय लगता है।
नेपाल से होकर आने वाले पानी के सैलाब से गंडक नदी में अचानक जल स्तर बढ़ने की संभावना है। इसको देखते हुए जल संसाधन विभाग ने अलर्ट घोषित कर दिया है। दोपहर 12.00 बजे वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज से 86,000 क्यूसेक पानी आया है। इसके और बढ़ने की संभावना है। नेपाल में नारायणी नदी का देवघाट गेज स्थल पर वर्तमान जलस्तर 4.77 मीटर है। इस स्थल पर खतरे का निशान 9 मीटर है। चेतावनी स्तर 7.30 मीटर है। यहां नदी में पानी बढ़ने पर गंडक बराज तक पहुंचने में लगभग 3.50 घंटे का समय लगता है।