शनि महाराज की टेढ़ी नजर से भला कौन नहीं डरता। शनि क्रोधित हो जाएं तो राजा को भी भीखारी बनाते भी इन्हें देर नहीं लगती। यही कारण है कि शनि को ज्योतिषशास्त्र में पाप ग्रह कहा गया है।
शनि महाराज की तरह ही इनकी बहन भद्रा भी काफी खतरनाक मानी जाती है। ज्योतिषशास्त्र में कहा गया है कि सूर्य देव की इस पुत्री का स्वरुप बड़ा ही भयंकर है। रंग काला, केश लंबे और दांत विकाराल है।
पढ़ें, 2014 में शनि करेंगे किसे परेशान और किस पर रहेंगे मेहरबानजन्म लेते ही यह संसार को खाने के लिए दौड़ पड़ी, यज्ञों को नष्ट कर दिया, मंगल यात्रों में बाधा डालने लगी। इनके इस व्यवहार के कारण किसी भी देवता ने विवाह करने से मना कर दिया। सूर्य देव ने जब विवाह के लिए स्वंवर का आयोजन किया तो भद्रा ने उसे भी नष्ट कर दिया।
तब ब्रह्मा जी ने भद्रा से कहा कि हे भद्रा तुम बव, बालव, कौलव, तैतिल आदि करणों के अंत में सातवें करण के रुप में स्थित रहो। इस तरह ब्रह्मा जी ने भ्रदा को समय का एक भाग दे दिया।
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ब्रह्मा जी ने भ्रदा से यह भी कहा कि जो व्यक्ति तुम्हारे समय में यात्रा, गृहप्रवेश, खेती, व्यापार और मांगलिक कार्य करे तुम उसमें विघ्न डालो। जो तुम्हारा आदर न करे, उसका कार्य ध्वस्त कर दो।
भद्रा ने ब्रह्मा जी की यह बात मान ली और समय के एक अंश में विराजमान हो गई। इसलिए किसी भी शुभ काम का आरंभ भद्रा काल में नहीं किया जाता है।