rahu makes you rich it is not bad

अशुभ नहीं है, आपको धनवान बनाता है राहू

ज्योतिषशास्त्र में राहु को शनि के समान अशुभ ग्रह माना गया है। राहु और केतु के प्रभाव के कारण ही किसी व्यक्ति की कुण्डली में कालसर्प नामक योग बनता है। इस ग्रह के विषय में आमतौर पर ऐसी धारणा है कि यह सिर्फ अशुभ प्रभाव देता है। लेकिन सच यह है कि कुण्डली में राहु अगर शुभ स्थिति में हो तो व्यक्ति को धन दौलत के साथ ही साथ समाज में उच्च पद एवं प्रतिष्ठा भी दिलाता है।

इन पर बनी रहती है लक्ष्मी की कृपा
राहु जब छठे भाव में स्थित होता है और केन्द्र में गुरू होता है तब यह अष्टलक्ष्मी नामक शुभ योग का निर्माण करता है। इस योग के बनने पर राहु अपना अशुभ प्रभाव नहीं देता है। यह योग जिस व्यक्ति की कुण्डली में होता है वह ईश्वर के प्रति श्रद्घावान होता है। अपने नेक गुणों एवं व्यवहार से ऐसा व्यक्ति मान सम्मान एवं यश प्राप्त करता है। माता लक्ष्मी की कृपा इन पर सदैव बनी रहती है।

जब राहु संकट से बचाता है
राहु संकटकारी ग्रह होने के बावजूद मेष, वृष एवं कर्क लग्न वालों की कुण्डली में जब द्वितीय, नवम अथवा दशम भाव को छोड़कर किसी भी अन्य भाव में होता है तब लग्न कारक योग बनाता है। जिस व्यक्ति की कुण्डली में यह योग होता है उनके साथ दुर्घटना होने की संभावना कम रहती है। इनकी आर्थिक स्थिति एवं स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है।

भाग्य देता है हर दम साथ
राहु को बाधक ग्रह माना गया है लेकिन जिस व्यक्ति की कुण्डली में राहु लग्न, तृतीय, छठे अथवा एकादश भाव में होता है और उस पर शुभ ग्रह की दृष्टि होती है उन्हें कोई भी बाधा लम्बे समय तक रोक नहीं पाती है। यह जिस काम में हाथ डालते हैं वह काम आसानी से हो जाता है। ज्योतिषशास्त्र में इस योग को परिभाषा योग कहा गया है। जिनकी कुण्डली में यह योग होता है वह जल्दी बीमार नहीं होते हैं। अपनी योग्यता के अनुरूप इन्हें आर्थिक लाभ मिलता रहता है।

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