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'फार्मा सेक्टर भारत की रणनीतिक ताकत': शाह ने शोध और नवाचार पर दिया जोर; चीन से मुकाबले की क्या है तैयारी?

Fri, 28 Aug 2026 12:22 AM IST
निर्मल कांत पीटीआई, अहमदाबाद।
पीटीआई, अहमदाबाद। Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 28 Aug 2026 12:22 AM IST
सार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत का दवा उद्योग देश की रणनीतिक ताकत है। सरकार का लक्ष्य दवाओं और मेडिकल उपकरणों के मामले में भारत को आत्मनिर्भर बनाना और चीन के दबदबे को चुनौती देना है। क्या रिसर्च और नई योजनाओं से भारत इस लक्ष्य को हासिल कर पाएगा? पढ़िए रिपोर्ट।

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Pharma sector is India's strategic asset, says Amit Shah, stresses need for innovation
अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/पीटीआई

विस्तार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि भारत का दवा उद्योग देश की 'राष्ट्रीय रणनीतिक संपत्ति' है। उन्होंने कहा कि भारत को सिर्फ दवाओं के मामले में आत्मनिर्भर नहीं बनना है। उसे पूरी दुनिया को दवाएं भी उपलब्ध करानी हैं।
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चीन के दबदबे को कैसे कम करेगा भारत?
अमित शाह ने अहमदाबाद में एक पुरस्कार समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि दवा उद्योग के लिए बनाए गए थोक दवा निर्माण पार्क और उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना यानी पीएलआई योजना चीन के दबदबे को खत्म करने में बहुत प्रभावी होंगी। गृह मंत्री ने कहा, मुझे भरोसा है कि आने वाले समय में इन योजनाओं का बड़ा असर होगा।
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उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने दवा उद्योग को मजबूत बनाने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। लेकिन आगे बढ़ने के लिए कंपनियों को अनुसंधान और नई तकनीक पर फोकस करना होगा। शाह ने कहा, एक समय भारत दवा उद्योग में बहुत आगे था। लेकिन धीरे-धीरे चीन ने उसकी जगह ले ली। इसके बावजूद मैं यह मानता हूं कि भारतीय दवा उद्योग भारत की राष्ट्रीय रणनीतिक संपत्ति है। इसे कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह भारत की परंपरा का हिस्सा है।
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उन्होंने यह बात फार्मइनोवा पुरस्कार समारोह 2026 में कही। यह समारोह फार्मास्युटिकल साइंस यानी दवा विज्ञान में शानदार शोध करने वालों को सम्मान देने के लिए आयोजित किया गया था। शाह ने कहा कि अब दवा उद्योग की जिम्मेदारी है। भारत को दवाओं के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ दुनिया को दवाएं भी देनी होंगी।

कंपनियां रिसर्च पर कैसे करेंगी फोकस?
उन्होंने कहा, हर कंपनी को शोध (शोध) पर ध्यान देना होगा। शोध कर रहे छात्रों और प्रोफेसरों को बढ़ावा देना होगा। भारत सरकार ने शोध के लिए तीन योजनाएं शुरू की हैं। फिर भी अगर किसी कंपनी को लगता है कि वह छोटी कंपनी है, तो पांच कंपनियां मिलकर काम कर सकती हैं। वे मुनाफे में हिस्सेदारी के आधार पर साथ काम कर सकती हैं।

शाह ने बताया कि मोदी सरकार ने दवा उद्योग में पीएलआई योजना लागू की है। इसका मकसद भारत में जरूरी एपीआई यानी दवाओं में इस्तेमाल होने वाले मुख्य कच्चे पदार्थ और मेडिकल उपकरण बनाने को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा, थोक दवा और चिकित्सा उपकरण पार्क नीति के तहत दुनिया के स्तर का विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) प्रणाली तैयार की जा रही है।  

ये भी पढ़ें: 'न आज पुराने हुए, न 100 साल बाद होंगे': अमित शाह बोले- भारतीय परंपराओं में रचा-बसा है महात्मा गांधी का संदेश


पीएलआई योजना का मकसद क्या है?
शाह ने कहा कि उन्होंने थोक दवा पार्क और पीएलआई योजना का विस्तार से अध्ययन किया है। ये दोनों योजनाएं दवा उद्योग के लिए हैं। आने वाले दिनों में ये चीन के दबदबे को खत्म करने में बहुत प्रभावी होंगी। उन्होंने बताया कि अब तक 67 हजार करोड़ रुपये का निवेश हो चुका है। वहीं, भारत से 3.64 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की दवाएं निर्यात की जा चुकी हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत सरकार ने यह सुनिश्चित करने की व्यवस्था की है कि साल 2028 से पहले भारतीयों को बैंडेज, सीटी स्कैन और एमआरआई मशीन जैसी सभी चीजें देश में ही बनी मिलें। कई कंपनियां इस दिशा में काम कर रही हैं। 
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