इस महीने कई ग्रहों की स्थिति बदल रही है। महीने की पहली तारीख को बुध तुला राशि में प्रवेश किया और हफ्ता भी नहीं गुजरा कि नवग्रहों में सबसे बड़ा ग्रह गुरू अपनी चाल बदलकर वक्री चाल चलने लगा है। गुरू की यह स्थिति जनवरी 2013 के अंतिम सप्ताह तक रहेगी। अक्तूबर महीने के दूसरे सप्ताह में 8 अक्तूबर को शनि ग्रह अपनी उच्च राशि तुला में अस्त हो रहा है।
महीने के अंत में यानी 23 अक्तूबर को प्रेम और कला का कारक ग्रह शुक्र अपनी नीच राशि कन्या में प्रवेश करने जा रहा है। ग्रहों की इस स्थिति का आंकलन करने पर ज्ञात होता है कि यह देश और समाज के लिए अनुकूल स्थिति नहीं है।
ज्योतिषशास्त्री 'चन्द्रप्रभा' का कहना है कि शुक्र के कन्या में पहुंचने से शुक्र का सूर्य और शनि से द्विर्द्वादश योग बनेगा। मनोरंजन एवं कला जगत से जुड़े लोगों को अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने से निराशा हो सकती है। महिलाओं के प्रति अपराध में वृद्धि होगी एवं इनके हितों की अनदेखी की जा सकती है।
शनि के अस्त होने से मौसम में अचानक परिवर्तन एवं प्राकृतिक आपदाएं आ सकती हैं। आगजनी एवं विस्फोट की घटनाएं घटित होने की भी आशंका है। गुरू के वक्री होने से राजनीतिक मूल्यों में गिरावट आएगी और नेताओं के बीच आपसी छींटाकसी में वृद्धि होगी।
इस दौरान जातिगत राजनीति को बढ़ावा मिलेगा। मानवीय भूल के कारण दुर्घटना एवं प्राकृतिक आपदाएं आ सकती है।
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