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गरीब मजदूरों का सस्ता चावल कारोबारियों को बेचने का आरोप: एफसीआई-नेरामैक पर सीबीआई की कार्रवाई; क्या है मामला?

Tue, 01 Sep 2026 02:34 AM IST
निर्मल कांत पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 01 Sep 2026 02:34 AM IST
सार

सीबीआई ने एफसीआई और नेरामैक के अधिकारियों पर गरीबों को मिलने वाला सस्ता चावल कारोबारियों को बेचने का आरोप लगाया है। जांच के मुताबिक, चावल सस्ती दर पर आवंटित कराया गया। इससे एफसीआई को 28 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान होने का आरोप है। रिपोर्ट में जानिए क्या है पूरा मामला।

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Subsidised rice meant for poor labourers 'sold to traders'; CBI books officials of FCI, NERAMAC
गरीबों का राशन कारोबारियों को बेचने का आरोप - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई ने भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) में कथित गड़बड़ी को लेकर एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि गरीब मजदूरों के लिए मिलने वाला सस्ता चावल उत्तर पूर्वी क्षेत्र कृषि विपणन निगम (नेरामैक) को दिया गया। बाद में यह चावल मुनाफे के लिए कारोबारियों को बेच दिया गया।
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सीबीआई ने क्या आरोप लगाए?
सीबीआई ने एफआईआर में एफसीआई और नेरामैक के वरिष्ठ अधिकारियों के नाम दर्ज किए हैं। एजेंसी ने कई तरह की गड़बड़ियों का आरोप लगाया है। इनमें चावल का वितरण नियमों के खिलाफ करना, अधिकारियों पर दबाव बनाना, चावल को कारोबारियों तक पहुंचाना और जनता को चावल बांटने का दिखावा करने के लिए कथित तौर पर गलत दस्तावेज तैयार करना शामिल है। इससे एफसीआई को 28 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान होने का आरोप है।
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सीबीआई के अनुसार, नेरामैक के गुवाहाटी स्थित अतिरिक्त महाप्रबंधक ने 7 जनवरी को दिल्ली सरकार के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री को पत्र लिखा था। इसमें हर सप्ताह 31 हजार मीट्रिक टन चावल देने की मांग की गई थी। यह मांग खुली बाजार बिक्री योजना (घरेलू) 2025-26 के तहत की गई थी। 
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इसमें नीलामी के बिना चावल बेचने की श्रेणी के तहत चावल आवंटित करने की मांग की गई थी। सीबीआई ने आरोप लगाया कि इसका मकसद आम लोगों, रोज कमाने वाले मजदूरों, श्रमिकों, दिल्ली में रहने वाले प्रवासी मजदूरों और उन लोगों को सस्ती दर पर चावल उपलब्ध कराना था, जिन्हें राशन कार्ड न होने के कारण सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी पीडीएस का लाभ नहीं मिल रहा था।

इसके बजाय जांच में आरोप है कि नेरामैक ने तीन निजी संस्थाओं के साथ समझौता किया। इसके बाद इन संस्थाओं के जरिये कारोबारियों को चावल उठाने की सुविधा दी गई। 
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