भारत में सदियों से कृषि-कर्म, यात्रा, विवाह, उत्त्सव आदि प्रयोज़नों के लिए ज्योतिषी से मुहूर्त देख कर कार्य आरम्भ करने की परंपरा रही है। कालांतर में अनेक प्रकार के मुहूर्त ग्रंथों के प्रचार के कारण इनमे कुछ भ्रांतियां व अन्धविश्वास भी जुड़ते चले गए।
ऐसी ही एक भ्रान्ति देश के कुछ भागो में 'सिंहस्त गुरु' में विवाह न करने को लेकर लम्बे समय से चली आ रही है। भारतीय ज्योतिष के सबसे प्रसिद्ध ग्रंथों में से एक मुहूर्त-चिंतामणि भी शामिल है, इसकी रचना रामदेवेज्ञ ने 1522 ईस्वी में की थी, सिंहस्त गुरु अर्थात गुरु के सिंह राशि में गोचर के समय गंगा से गोदावरी के बीच के क्षेत्रों में विवाह करने को निषेध कहा गया है।
नारद संहिता के अनुसार गुरु के सिंह राशि और सिंह नवमांश में रहने पर विवाह नहीं करना चाहिए। ज्योतिष जगत में मुहूर्त चिंतामणि ग्रन्थ की लोकप्रियता बढ़ने के साथ उसका यह मत की 'सिंह राशि में गुरु के गोचर के समय गंगा से गोदावरी के बीच के प्रदेशो में विवाह निषेध है' अधिक प्रचलित होता गया।