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VIDEO : उत्तकाशी रवांई घाटी में देवलांग पर्व का उत्साह...अंधेरे से उजाले की ओर ले जाने का प्रतीक

रेनू सकलानी Updated Tue, 03 Dec 2024 03:01 PM IST

रवांई घाटी में पौराणिक व लोक परंपरा से जुड़ा देवलांग पर्व उत्साह व उमंग के साथ मनाया गया। अंधेरे से उजाले की ओर के प्रतीक के रूप में मनाए जाने वाले देवलांग पर्व में बड़ी संख्या में प्रदेश के साथ देश के अन्य राज्यों से लोग पहुंचे। इस दौरान राजा रघुनाथ मंदिर परिसर में लोगों का हुजूम उमड़ा। क्षेत्र के साठी-पानशाई थोकों के साथ अन्य क्षेत्रों से पहुंचे लोगों के पारंपरिक लोकनृत्य की प्रस्तुति से क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति की झलक देखने को मिली। सुबह करीब पांच बजे देवलांग का उत्साह और राेमांच अपने चरम पर नजर आया। देवलांग (देवदार का पेड़) को हाथों, डंडों के सहारे उठाए जाने की प्रक्रिया के साथ ही वह पल भी नजदीक आने लगता है, जिस पल का हजारों लोग हर साल इंतजार करते हैं। सुबह होते ही भोर की पहली किरण के साथ छह से साढ़े छह बजे के बीच देवलांग को खड़ा किया जाता है।देवलांग के खड़ा होने के साथ ही उस पर आग लगने के बाद राजा रघुनाथ, श्री मड़केश्वर महादेव और संगटारू वीर के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठता है। लोगों ने राजा रघुनाथ का आशीर्वाद लिया और देवलांग की राख से टीका कर अपने घरों की ओर रवाना हुए। देवलांग पर्व की संपन्नता मड़केश्वर धाम में हवन और पूजा के बाद ही पूर्ण माना जाता है। देवलांग पर आग लगने के बाद मड़केश्वर धाम के पुजारी गौड़ ब्राह्मण गौर गांव के ग्रामीणों के साथ काफी संख्या में भक्त दर्शनार्थ मंदिर पहुंचते हैं। हवन और पूजा होने के साथ देवलांग पर्व विधिवत संपन्न हो गया। साथ ही गंगटाड़ी व कुथनौर में भी देवलांग पर्व मनाया गया।

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