श्रीनगर। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग एवं प्रकृति रिसर्च सोसाइटी उत्तराखंड के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को हिमालय दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में हिमालय के पर्यावरण, पारिस्थितिकी, जैव विविधता और बदलते जलवायु परिदृश्य को लेकर मंथन किया गया। इस अवसर पर ‘जियोग्राफर ऑफ उत्तराखंड’ पुस्तक तथा ‘हिमालय बुलेटिन’ शोध जर्नल का विमोचन किया गया। वक्ताओं ने हिमालयी क्षेत्र में तेजी से हो रहे पर्यावरणीय बदलावों पर चिंता जताते हुए हिमालय के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक शोध, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और पारंपरिक ज्ञान को बढ़ावा देने पर जोर दिया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि हिमालय देश की जलवायु और जल सुरक्षा के साथ ही जैव विविधता का महत्वपूर्ण आधार है। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से हिमालयी क्षेत्र में मौसम के बदलते मिजाज, जलस्रोतों पर बढ़ता दबाव और प्राकृतिक आपदाओं जैसी चुनौतियां बढ़ रही हैं। ऐसे में हिमालय के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को ध्यान में रखते हुए विकास की नीतियां तैयार करने की जरूरत है। इस दौरान डीन प्रो. एमएस नेगी, प्रो. एनएस पंवार, कुलसचिव प्रो. वाईपी रैवानी, प्रो. बीपी नैथानी, डॉ. राजेश भट्ट समेत भूगोल विभाग के शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।