बीएचयू के वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. ओमशंकर ने पद्मश्री डॉ. टी.के. लहरी से कथित मारपीट के मामले में अपने फेसबुक पर वीडियो जारी कर विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि घटना के दिन 29 अगस्त को डॉ. लहरी के कमरे में मौजूद व्यक्ति खुद को चश्मदीद गवाह बता रहा है। डॉ. ओमशंकर के अनुसार, इस गवाह के सामने आने से घटना को लेकर नए तथ्य सामने आ सकते हैं। डॉ. ओमशंकर ने अपने बयान में दावा किया कि 29 अगस्त की सुबह करीब 11 बजे डॉ. अरविंद पांडे ने डॉ. टी.के. लहरी के साथ थप्पड़ और घूंसों से मारपीट की। उनके मुताबिक, डॉ. लहरी खुद को स्वस्थ महसूस कर रहे थे और घर जाने की इच्छा जता रहे थे। डॉ. ओमशंकर ने कहा कि जब वह डॉ. लहरी से मिले थे तो उन्हें मनोरोगी जैसा कोई लक्षण नहीं दिखा और उन्हें दी जा रही दवाओं में भी मनोरोग संबंधी दवा शामिल नहीं थी। उन्होंने घटना के दिन की तस्वीरों का हवाला देते हुए दावा किया कि डॉ. लहरी की आंख, भौंह, गाल, ललाट और नाक के आसपास चोट व सूजन के निशान दिखाई दे रहे थे। डॉ. ओमशंकर का आरोप है कि घटना सामने आने के बाद डॉ. अरविंद पांडे ने बीएचयू के चिकित्सकों के वाट्सऐप समूह में डॉ. लहरी पर बल प्रयोग किए जाने की बात स्वीकार की थी। डॉ. ओमशंकर ने विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका दावा है कि घटना के बाद केवल स्वास्थ्य परीक्षण समिति गठित की गई, लेकिन उसकी संस्तुति सार्वजनिक नहीं की गई। उन्होंने यह भी कहा कि सर सुंदरलाल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक की ओर से घटना में मारपीट से इनकार किया जाता रहा। उन्होंने कुलपति पर भी आरोपित चिकित्सक को संरक्षण देने का आरोप लगाया और विभिन्न पुराने मामलों का उल्लेख करते हुए प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। डॉ. ओमशंकर ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर तथ्य सामने लाए जाने चाहिए, ताकि डॉ. टी.के. लहरी के सम्मान और न्याय के सवाल का समाधान हो सके।