तुलसीपुर। जमुनहा तहसील क्षेत्र में राप्ती का कहर बदस्तूर जारी है। राप्ती की क्रूर लहरें ग्राम पंचायत हरिहरपुर करनपुर के मजरा पिपरहवा में किसानों के फसल लगे खेतों को निशाना बना रही हैं। बीते तीन-चार दिनों के भीतर राप्ती 100 बीघा से अधिक भूमि को निगल चुकी है और तेजी से गांव की ओर बढ़ रही है। वहीं, अगर किसानों की जुबानी मानें तो ये आंकड़ा 500 बीघा से अधिक है। कटान को लेकर किसान दहशत में हैं और शासन-प्रशासन के प्रति किसानों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। राप्ती का जलस्तर घटने के साथ ही राप्ती नदी जमुनहा तहसील क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक गांवों में कटान कर रही है। सोमवार को कटान प्रभावित पिपरहवा गांव की पड़ताल की गई तो किसानों को दर्द उभरकर सामने आया। गांव निवासी प्रदीप कुमार सिंह, ध्रुप कुमार सिंह, कृतपाल सिंह, अक्षय कुमार सिंह, रक्षाराम, अम्बरलाल, संतराम, बीपत, सालिकराम, शोभाराम चौधरी, मंशाराम, सुंदर, नंदराम आदि ने बताया कि राप्ती अब तक फसल लगे 500 बीघा से अधिक खेतों को काट कर नदी की धारा में समाहित कर चुकी है। किसानों ने बताया कि नदी की धारा बीते कुछ दिनों से खेतों की ओर से है और तेजी से कटान कर रही है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि जिम्मेदारों की ओर से कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं, जिसके चलते कटान रुकने का नाम नहीं ले रही है। गन्ने व धान की फसल को भारी नुकसान किसानों ने बताया कि राप्ती उपजाऊ भूमि को काट रही है। किसानों ने बताया कि खेत में खड़ी धान व गन्ने की फसल उनकी आंखों के सामने धीरे-धीरे कर नदी की धारा में समा रही है और वह सब दर्शक बनने के अलावा कुछ नहीं कर पा रहे हैं। कुछ किसानों ने बताया कि भारी लागत लगाने के बाद मजबूरन हरी फसल को काट कर मवेशियों को चारे के रूप में खिलाना पड़ रहा है। किसानों ने बताया कि अगर समय रहते जिम्मेदार नहीं चेते तो हम सब की फसल चौपट हो जाएगी और कई किसान भूमिहीन हो जाएंगे। किसानों ने डीएम से निरीक्षण करवाकर मदद की गुहार लगाई है।