रायबरेली में विकास के दावों के बीच पूरे तुलसी मजरे सेमौरी गांव के ग्रामीण आज भी एक अदद पक्की सड़क के लिए तरस रहे हैं। करीब 300 की आबादी वाले इस गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाला लगभग दो किलोमीटर का रास्ता बरसात में दलदल में तब्दील हो जाता है। रास्ते में महज कुछ मीटर ही खड़ंजा लगा है, जबकि बाकी पूरा मार्ग कच्चा है। बारिश होते ही ग्रामीणों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो जाता है। बरसात के दिनों में गांव में किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने पर सबसे बड़ी समस्या सामने आती है। कच्चे और कीचड़ भरे रास्ते के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। ऐसे में ग्रामीण मरीज को चारपाई पर लादकर करीब दो किलोमीटर तक ले जाते हैं। इसके बाद मुख्य मार्ग पर पहुंचने पर एंबुलेंस से अस्पताल ले जाना संभव हो पाता है। बारिश के बाद रास्ते पर जगह-जगह कीचड़ हो जाने से स्कूली बच्चों को भी परेशानी उठानी पड़ती है। ग्रामीणों के मुताबिक कई बार बच्चे स्कूल नहीं जा पाते। स्कूली वाहन भी कच्चे रास्ते के कारण गांव तक नहीं पहुंचते। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। आशीष कुमार, रामखेलावन, राम बहादुर, राम प्रकाश, सुरेश, संजय और पित्तू लाल ने बताया कि गांव के लोग करीब 25 वर्षों से पक्की सड़क की मांग कर रहे हैं। कई बार अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों से गुहार लगाई गई, लेकिन हर बार आश्वासन ही मिला। वर्षों बीत गए, लेकिन सड़क की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क का निर्माण केवल आवागमन की सुविधा नहीं, बल्कि बीमारी की स्थिति में समय पर इलाज, बच्चों की शिक्षा और गांव के समग्र विकास के लिए बेहद जरूरी है। खंड विकास अधिकारी रामखेलावन ने बताया कि बारिश के सड़क का निर्माण करवाया जाएगा अभी बारिश की वजह से कार्य करवाना संभव नहीं है।