गढ़ रोड स्थित राज राजेश्वरी मंडप में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सप्तम दिवस बाल कथा व्यास पंडित अंश वशिष्ठ महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के 16108 विवाह का वर्णन किया। सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष, दत्तात्रेय चरित्र, भगवान श्रीकृष्ण के स्वधाम गमन तथा विभिन्न पुराणों की श्लोक संख्या का भावपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक वर्णन किया। कथा व्यास ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने भौमासुर के बंधन से मुक्त हुईं 16,100 कन्याओं को सामाजिक सम्मान प्रदान करते हुए उन्हें अपनी शरण में स्वीकार किया। भगवान की योगमाया ऐसी थी कि वे प्रत्येक रानी के साथ अलग-अलग महलों में एक साथ उपस्थित रहते थे। यह भगवान की दिव्य शक्ति एवं सर्वव्यापकता का प्रमाण है।