मथुरा के महावन में बृज के प्रमुख तीर्थ स्थलों में भगवान श्री कृष्ण की क्रीड़ा स्थली गोकुल में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और नंदोत्सव लेकर धार्मिक उल्लास का माहौल है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए नंदोत्सव विशेष आस्था का केंद्र रहता है। जन्माष्टमी पर मथुरा पहुंचने वाले श्रद्धालु जन्माष्टमी से अगले दिन गोकुल पहुंचकर नंद बाबा के घर आयोजित नंदोत्सव में शामिल होते हैं। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की बधाई देते हैं। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का बाल्यकाल गोकुल में ही बीता था। मंदिर के सेवायत कुंदन लाल शर्मा ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण गोकुल में 11 वर्ष 52 दिन रहे कंस के भय के कारण वासुदेव भगवान श्रीकृष्ण को रात्रि में गोकुल लाकर नंद बाबा के घर माता यशोदा के पास सुलाकर चले गए थे। भगवान श्रीकृष्ण ने गोकुल में बाल लीलाएं कीं। उन्होंने मिट्टी खाना, माखन चोरी, गोपियों की मटकी फोड़ना, यमलार्जुन उद्धार और रमणरेती में रासलीला सहित अनेक लीलाएं कीं। उन्होंने बताया कि मंदिर को फूल-पत्तियों, रंग-बिरंगे गुब्बारों और बिजली की झालरों से आकर्षक ढंग से सजाया जाएगा। ठाकुरजी का डोला नंदभवन-नंदकिला से गोकुल की विभिन्न गलियों से होते हुए नंद चौक और रास चबूतरा पहुंचेगा। यहां भजन-कीर्तन और गायन के साथ श्रद्धालुओं को वस्त्र, खिलौने, मिठाई सहित विभिन्न उपहार लुटाए जाएंगे। पांच सितंबर शनिवार को भव्य नंदोत्सव मनाया जाएगा। सुबह 10 बजे नंद किला नंद भवन से बालकृष्ण भगवान का डोला गोकुल की विभिन्न गलियों से होकर नंद चौक स्थित राज चबूतरा पहुंचेगी। नंद परिवार के लिए विशेष पोशाक भी तैयार कराई गई है।