अयोध्या: अमर उजाला की ओर से आयोजित संवाद कार्यक्रम में शिक्षकों ने कहा कि मोबाइल की स्क्रीन पर लगातार चलती उंगलियों के बीच बच्चों के हाथों से किताब और अखबार दूर होते जा रहे हैं। बच्चों को केवल मोबाइल से रोकने के बजाय पढ़ने के बेहतर विकल्प देने होंगे। घर में अभिभावक खुद मोबाइल का इस्तेमाल कम करें और बच्चों के साथ किताब-अखबार पढ़ें। स्कूलों में लाइब्रेरी को सक्रिय करने के साथ अखबार की खबरों पर चर्चा, नए शब्द खोजने, पहेली, कहानी और सवाल-जवाब जैसी गतिविधियां कराई जाएं तो पढ़ने की आदत दोबारा विकसित की जा सकती है। शिक्षक शिव शंकर वर्मा ने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में बच्चों को अखबार से जोड़ना चुनौती है, लेकिन अभिभावक और शिक्षक मिलकर इसमें बदलाव ला सकते हैं। रितेश कुमार जायसवाल ने कहा कि मोबाइल पर दिए जाने वाले लंबे समय में से दो घंटे किताब, अखबार या मैगजीन पढ़ने के लिए निकाले जाएं। अनाम सिंह के अनुसार बच्चों के सामने अभिभावकों को मोबाइल कम इस्तेमाल करना चाहिए। स्कूल के नोटिस बोर्ड और ब्लैकबोर्ड पर अखबार की महत्वपूर्ण खबरें लिखवाने से बच्चों में पढ़ने और लिखने की आदत बनेगी। ललित रंजन भटनागर ने हर विद्यालय में लाइब्रेरी और बच्चों के खाली समय में वहां पढ़ने की व्यवस्था की जरूरत बताई। शिव शंकर सोनी ने सोशल मीडिया पर बच्चों की गतिविधियों पर अभिभावकों की नजर जरूरी बताई। आशुतोष तिवारी ने लाइब्रेरी पीरियड में बच्चों को अखबार पढ़ाने और पहेली, कहानी व सवाल-जवाब जैसी सामग्री से जोड़ने की बात कही। रविंद्र कुमार प्रजापति ने कहा कि बच्चों को शब्द ज्ञान देने के लिए अखबार उपयोगी माध्यम है। अजय कुमार सिंह ने अखबार से शब्द, खबर और तथ्य खोजने की गतिविधि कराने की बात कही। मोहम्मद शोएब ने अखबार को स्कूल के बाद दूसरी पाठशाला बताया। अवधेश मिश्रा ने कहा कि बच्चों के खाली समय को पुस्तकालय से जोड़ना चाहिए और इंटरनेट का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार हो। नीलमणि त्रिपाठी ने कहा कि पढ़ने की आदत बचपन से विकसित करनी होगी। इसके लिए बच्चों की रुचि की किताबें, कहानी और ज्ञानवर्धक सामग्री उपलब्ध कराने के साथ घर और स्कूल दोनों जगह लगातार प्रयास जरूरी हैं।