आगरा। ओलंपियन, अंतरराष्ट्रीय और एशियाई खेलों के पदक विजेता देने वाला आगरा नई प्रतिभाओं के लिए सीमित मैदानों और संसाधनों से जूझ रहा है। चार-पांच लाख आबादी के दौर का ढांचा आज 25-30 लाख की आबादी का बोझ उठा रहा है। एकलव्य स्टेडियम प्रमुख सहारा है, पर मैदान, स्टैंड व प्रशिक्षकों की व्यवस्था सवालों में है। विशेषज्ञ हर इलाके और गांव तक खेल नेटवर्क चाहते हैं। स्टेडियम की मिट्टी खराब होने की रिपोर्ट के बावजूद जमीन नहीं बदली गई। मध्य दर्शक स्टैंड जर्जर है, तकनीकी परीक्षण जरूरी है। बड़े मैचों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम, प्रशिक्षण के लिए मैदान, ट्रैक, मैट, जिम, उपकरण व विशेषज्ञ कोच चाहिए। खेरिया मोड़ का प्रस्तावित स्टेडियम तथा अकोला, किरावली, एत्मादपुर व फतेहाबाद में हाईटेक केंद्र विकसित हों।