भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर अमृतसर के प्रसिद्ध दुर्ग्याणा मंदिर में शुक्रवार को श्रद्धा और उत्साह का माहौल रहा। तड़के से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। दिन चढ़ने के साथ मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ बढ़ती गई। दूर-दराज के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर दुर्ग्याणा मंदिर को फूलों और रंग-बिरंगी आकर्षक लाइटों से भव्य तरीके से सजाया गया है। मंदिर परिसर में विशेष सफाई के साथ जन्मोत्सव से जुड़ी धार्मिक रस्मों की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर परिवार की सुख-शांति, खुशहाली और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते नजर आए। मंदिर के पुजारी पंडित मेघा शाम लाल जी ने बताया कि सनातन धर्म में जन्माष्टमी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने द्वापर युग में इसी दिन मध्यरात्रि को अवतार लिया था। मंदिर में कई दिन से जन्माष्टमी की तैयारियां चल रही थीं। भगवान के जन्म के समय विशेष पूजा-अर्चना और आरती की जाएगी। उन्होंने बताया कि मध्यरात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का पंचामृत, दूध, दही, शहद, शक्कर और गंगाजल से अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद भगवान को नए वस्त्र पहनाकर माखन-मिश्री समेत विभिन्न व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा। पुजारी राधे श्याम ने बताया कि रात 12 बजे श्रीकृष्ण जन्म के बाद विशेष धार्मिक अनुष्ठान और अभिषेक होगा। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का अंत कर धर्म की स्थापना का संदेश दिया था। जन्माष्टमी का पर्व लोगों को सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। मंदिर परिसर दिनभर ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयकारों से गूंजता रहा।