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Video: दुबग्गा में जाम बना लोगों की नियति, सड़क पर खड़े टेंपो-ऑटो और ई-रिक्शा से थम रही रफ्तार

दुबग्गा के छदुईय्या तिराहे से लेकर कानपुर बाईपास तिराहे तक रोजाना लगने वाला जाम अब स्थानीय लोगों की नियति बन चुका है। सुबह दफ्तर जाने की जल्दबाजी हो या शाम को घर लौटने की आपाधापी, सड़क पर वाहन घंटों रेंगते नजर आते हैं। सड़क किनारे अतिक्रमण और बेतरतीब ढंग से खड़े टेंपो, ऑटो व ई-रिक्शा ने इलाके की यातायात व्यवस्था की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। व्यापारी नेता बीनू शुक्ला जिला पंचायत सदस्य निहाल अहमद सिद्दीकी समेत अन्य कई व्यापारियों का आरोप है कि दुबग्गा से संचालित होने वाले टेंपो, ऑटो और ई-रिक्शा चालक सड़क पर ही वाहन खड़े कर सवारियां भरते हैं। कानपुर बाईपास तिराहे पर ऑटो, मैजिक, बस और ई-रिक्शा चालकों की मनमानी के चलते सड़क का बड़ा हिस्सा घिर जाता है। इससे मुख्य मार्ग के साथ-साथ सर्विस लेन पर भी यातायात प्रभावित होता है। अतिक्रमण ने बढ़ाई परेशानी मुख्य सड़क से लेकर सर्विस लेन तक अवैध कब्जों का जाल फैला हुआ है। सड़क किनारे सब्जी और फलों के ठेले लगने के कारण वाहनों के निकलने के लिए जगह कम पड़ जाती है। इसके बाद सड़कों पर खड़े होकर सवारियां भरते टेंपो, ऑटो और ई-रिक्शा जाम की समस्या को और गंभीर बना देते हैं।हैरानी की बात यह है कि छदुईय्या और कानपुर बाईपास तिराहे पर पुलिस और ट्रैफिक पुलिस के बूथ मौजूद हैं। इसके बावजूद यातायात व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पा रही है। सुबह सब्जी मंडी के बाहर ठहर जाती है रफ्तार दुबग्गा सब्जी मंडी के बाहर सर्विस लेन सुबह करीब छह बजे से दस बजे तक जाम की चपेट में रहती है। सड़क पर खड़े वाहनों और ठेलों के कारण कई बार पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जाम के दौरान मरीजों को लेकर जा रही एम्बुलेंस तक को रास्ता मिलने में परेशानी होती है। ग्राहक पहुंचने से पहले लौट जाते हैं स्थानीय व्यापारी बीनू शुक्ला ने बताया कि लगातार जाम और अतिक्रमण का असर कारोबार पर पड़ रहा है। ग्राहक जाम में फंसने के डर से बाजार आने से बचते हैं। रविवार और मंगलवार को लगने वाले साप्ताहिक बाजार के दौरान स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। शाम होते-होते सड़कें पार्किंग स्थल में तब्दील हो जाती हैं और यातायात की रफ्तार पूरी तरह थम जाती है। कई बार कार्रवाई, फिर लौट आता है अतिक्रमण व्यापारियों के अनुसार नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीम कई बार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर चुकी है, लेकिन कुछ ही दिनों बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है। लोगों का कहना है कि जब कार्रवाई के बाद भी सड़क पर कब्जा और बेतरतीब पार्किंग दोबारा शुरू हो जाती है तो जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। दुबग्गा की सड़कों पर हर दिन लगने वाला जाम अब केवल यातायात की समस्या नहीं रह गया है। इसका असर नौकरीपेशा लोगों, स्कूली बच्चों, व्यापारियों और मरीजों पर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों की मांग है कि अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ सड़क पर वाहन खड़े कर सवारियां भरने वाले टेंपो, ऑटो और ई-रिक्शा चालकों के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए, ताकि छदुईय्या तिराहे से कानपुर बाईपास तक सड़कें फिर से सुगम हो सकें।

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