जिंदगी ने करनदीप को बचपन में ही ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया था, जहां सिर पर माता-पिता का साया भी नहीं था और भविष्य का रास्ता भी साफ नहीं था। महज तीन महीने की उम्र में मां का निधन हो गया। अभी बचपन की मुश्किलें समझने की उम्र भी नहीं हुई थी कि पांचवीं कक्षा में पढ़ते हुए पिता भी दुनिया छोड़ गए। इसके बाद जिंदगी का सहारा बनीं उनकी बड़ी बहनें। सिलाई-कढ़ाई का काम करते हुए उन्होंने छोटे भाई की परवरिश की और उसे आगे बढ़ने का हौसला दिया। आज वही 24 वर्षीय करनदीप अपने पैरों पर खड़े हैं। ऊना के रामपुर में उनका अपना ‘रॉयल लुक’ हेयर सैलून है। वह हर महीने करीब 30 से 35 हजार रुपये कमा रहे हैं और अपने हुनर को आगे बढ़ाते हुए चार युवाओं को हेयर सैलून का काम भी सिखा रहे हैं। करनदीप की यह कहानी मेहनत, संघर्ष और मिले हुए अवसर को सफलता में बदलने की कहानी है। हरोली उपमंडल के रोड़ा गांव निवासी करनदीप तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। उनके पिता लुधियाना में हलवाई का काम करते थे। बचपन में ही माता-पिता के निधन के बाद बड़ी बहनों ने उनकी जिम्मेदारी संभाली। परिवार की परिस्थितियां आसान नहीं थीं, लेकिन करनदीप ने आगे बढ़ने का रास्ता तलाशना जारी रखा। 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने हेयर सैलून का काम सीखना शुरू किया। वर्ष 2019-20 में करीब दो साल तक गुरुग्राम में काम करके उन्होंने इस क्षेत्र की बारीकियां सीखीं। इसके बाद वर्ष 2021 से 2024 तक ऊना और वर्ष 2024-25 में हरोली में काम करते हुए अनुभव हासिल किया। नौकरी करते हुए उनके मन में अपना कारोबार शुरू करने का सपना लगातार पलता रहा। करनदीप को मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के बारे में आईसीडीएस विभाग के माध्यम से जानकारी मिली। वर्ष 2025 में उन्हें योजना के तहत हर महीने चार हजार रुपये का भत्ता मिलना शुरू हुआ। इसके बाद जब अपना कारोबार शुरू करने के लिए वर्ष 2026 में उन्हें योजना के तहत दो लाख रुपये की सहायता मिली, तो वर्षों से देखा जा रहा सपना हकीकत में बदलने का मौका मिला। फरवरी 2026 में उन्होंने ऊना के रामपुर में किराये की दुकान ली और अपने सैलून का नाम रखा 'रॉयल लुक'। मिली सहायता में से करीब 1.40 लाख रुपये सैलून का सामान खरीदने पर खर्च किए गए, जबकि शेष 60 हजार रुपये से दूसरी जरूरी व्यवस्थाएं पूरी की गईं। शुरुआत छोटी थी, लेकिन करनदीप के पास हुनर था, वर्षों का अनुभव था और अपने पैरों पर खड़े होने का मजबूत इरादा था। धीरे-धीरे ग्राहक बढ़ने लगे और कारोबार चल पड़ा। करनदीप बताते हैं कि आज ‘रॉयल लुक’ सैलून से उन्हें हर महीने करीब 30 से 35 हजार रुपये की आमदनी हो रही है। जिस काम को कभी उन्होंने दूसरों से सीखा था, वही हुनर आज उनकी आत्मनिर्भरता का आधार बन चुका है। लेकिन करनदीप की कहानी यहीं खत्म नहीं होती। उन्होंने अपने तक सीमित रहने के बजाय अपना हुनर दूसरों को सिखाने का फैसला किया है। वर्तमान में वह चार युवाओं को हेयर सैलून का काम सिखा रहे हैं और उन्हें करीब दो-दो हजार रुपये प्रतिमाह दे रहे हैं। इनसे पहले एक युवक यहां काम सीखने के बाद दुबई चला गया। यानी जिस हुनर ने करनदीप को अपने पैरों पर खड़ा किया, अब वही किसी और के भविष्य की राह भी तैयार कर रहा है। करनदीप की दोनों बड़ी बहनों की शादी हो चुकी है। अब उनका पूरा ध्यान अपने कारोबार को आगे बढ़ाने पर है। रामपुर में शुरू किए गए छोटे से सैलून को वह भविष्य में बड़ा करना चाहते हैं। उनका सपना है कि कारोबार बढ़े तो इसके साथ और युवाओं को भी प्रशिक्षण और रोजगार का अवसर मिल सके। करनदीप इस सफर में मिले सहयोग को याद करते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। हिमाचल सरकार के अनुसार, मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना का उद्देश्य विशेष देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों और युवाओं को शिक्षा, कौशल विकास तथा आत्मनिर्भरता की दिशा में सहायता देना है। योजना के तहत पात्र लाभार्थियों के लिए आर्थिक सहायता और स्वरोजगार शुरू करने के लिए सहायता सहित विभिन्न सहयोग का प्रावधान बताया गया है। करनदीप की कहानी में सबसे खास बात सिर्फ यह नहीं कि उन्होंने अपना सैलून खोल लिया। खास बात यह है कि जिस उम्र में उन्होंने माता-पिता को खो दिया, उसी जिंदगी को उन्होंने अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। बड़ी बहनों के सहारे से पढ़ाई पूरी की, हुनर सीखा, कई साल मेहनत की और जब अपना काम शुरू करने का अवसर मिला तो उसे हाथ से जाने नहीं दिया। आज उनके सैलून की कुर्सी पर बैठने वाले ग्राहक शायद सिर्फ एक हेयरकट या स्टाइल के लिए आते हैं, लेकिन उस दुकान के पीछे एक ऐसे बच्चे की कहानी है, जिसने बहुत कम उम्र में जिंदगी का सबसे बड़ा खालीपन देखा और फिर उसी जिंदगी को अपने हुनर से संवारना सीख लिया। अब करनदीप अकेले आगे नहीं बढ़ना चाहते। उनका सपना है कि उनके साथ कुछ और युवा भी अपने पैरों पर खड़े हों। एक छोटे से सैलून से शुरू हुई यह कहानी शायद अभी छोटी है, लेकिन इसके सपने बड़े हैं।