जीएसटी राजस्व की निगरानी और कर संग्रह की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन के आबकारी एवं कराधान विभाग ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल से कर प्राप्तियों का हिसाब रखने, सरकारी खातों में जमा राशि का मिलान करने और राजस्व से जुड़ी विसंगतियों की पहचान करने में मदद मिलेगी। व्यवस्था का उद्देश्य कर संग्रह से संबंधित आंकड़ों की निगरानी को बेहतर बनाना है। एमओयू पर चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से उपायुक्त-सह-आबकारी एवं कराधान आयुक्त निशांत कुमार यादव और आरबीआई के सरकारी एवं बैंक लेखा विभाग के मुख्य महाप्रबंधक शिवकुमार बोस ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर आबकारी एवं कराधान विभाग और आरबीआई के अधिकारी भी मौजूद रहे। समझौते के तहत एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (आईजीएसटी) सहित लागू कर प्राप्तियों को जमा करने और उनके प्रबंधन के लिए औपचारिक व्यवस्था तैयार की जाएगी। व्यापारियों के लिए उपलब्ध भुगतान सुविधाओं के अनुसार कर जमा करने की प्रक्रिया संचालित होगी। साथ ही, संग्रह प्रणाली से सरकारी खातों तक राशि के हस्तांतरण और उसके मिलान को व्यवस्थित करने पर जोर दिया जाएगा। इस व्यवस्था से विभाग को यह पता लगाने में सहूलियत होगी कि निर्धारित अवधि में कितना कर जमा हुआ और सरकारी खातों में दर्ज राशि का कितना हिस्सा मिलान के लिए लंबित है। आंकड़ों में अंतर सामने आने पर उसकी जांच करना भी आसान हो सकेगा।