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कुल्लू: 18वीं बार पेड़ को राखी बांधी कल्पना ने, पर्यावरण संरक्षण को बनाया भाई-बहन के रिश्ते का प्रतीक

भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का पर्व रक्षाबंधन शुक्रवार को देशभर में धूमधाम से मनाया जा रहा है। इसी बीच कुल्लू के अलेउ में रक्षाबंधन का एक अनोखा दृश्य देखने को मिला। पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाली कल्पना ने लगातार 18वीं बार एक पेड़ को राखी बांधी। कल्पना इस पेड़ को अपना भाई मानती हैं। खास बात यह है कि वह महज तीन साल की उम्र से इस पेड़ की कलाई पर राखी बांधती आ रही हैं। उनके लिए रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के रिश्ते का पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति अपने लगाव और जिम्मेदारी को जाहिर करने का अवसर भी है। मनाली के अलेउ की रहने वाली कल्पना ने इस अनोखी परंपरा को वर्षों से जारी रखा है। हर रक्षाबंधन पर वह पेड़ को राखी बांधती हैं और उसके संरक्षण का संदेश देती हैं। इस बार उन्होंने 18वीं बार पेड़ की कलाई पर राखी बांधकर प्रकृति के साथ अपने रिश्ते को फिर मजबूत किया। कल्पना का यह प्रयास पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने का भी माध्यम बन रहा है। पेड़ को भाई मानकर राखी बांधने की उनकी पहल रक्षाबंधन के पारंपरिक भाव को प्रकृति संरक्षण से जोड़ती है। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में काम कर रहीं कल्पना अब तक कुल्लू सहित हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और लद्दाख के विभिन्न क्षेत्रों में 5,000 से अधिक पौधे रोप चुकी हैं। पौधरोपण के साथ वह पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी लोगों तक पहुंचा रही हैं। कल्पना पर्यावरणविद् किशन लाल की बेटी हैं। पर्यावरण के प्रति उनका लगाव बचपन से ही रहा है और पेड़ को राखी बांधने की यह परंपरा उसी जुड़ाव का हिस्सा है। रक्षाबंधन के दिन जब बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर रिश्ते को मजबूत कर रही हैं, वहीं कल्पना ने पेड़ को राखी बांधकर प्रकृति के साथ अपने रिश्ते की मिसाल पेश की। उनका यह अनोखा रक्षाबंधन पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के साथ लोगों को पेड़-पौधों के प्रति जिम्मेदारी का एहसास भी कराता है।

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