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करनाल: राष्ट्रमंडल पैरा तलवारबाजी चैंपियनशिप में राजीव ने जीता स्वर्ण पदक, पावर लिफ्टिंग से शुरू किया था सफर, आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमका रहे जिले का नाम

करनाल। इच्छाशक्ति और बुलंद हौसलों के आगे शारीरिक बाधाएं भी घुटने टेक देती हैं। इस बात को सच कर दिखाया जिले के होनहार पैरा एथलीट राजीव ने। कभी जिम की चार दीवारों में पावर लिफ्टिंग से अपने खेल जीवन की शुरुआत करने वाले राजीव ने आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश , प्रदेश और जिले का परचम लहराया है। हाल ही में आयोजित राष्ट्रमंडल पैरा तलवारबाजी चैंपियनशिप में राजीव ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश के लिए स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। हालांकि, इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे राजीव का सालों का कड़ा संघर्ष, अनदेखी और सुविधाओं का अभाव भी छिपा हुआ है। राजीव की खेल यात्रा काफी प्रेरणादायक रही है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक पॉवरलिफ्टर के रूप में की थी। पॉवरलिफ्टिंग के दौरान उन्होंने अपनी शारीरिक ताकत और एकाग्रता को साबित किया। राजीव ने बताया कि उनके सीधे पैर का पंजा मुड़ा हुआ था। वर्ष 2009 में ऑपरेशन करवाने के बाद स्थिति बॉडी बिल्डिंग के लिए बेहतर नहीं रही। ऐसे में वर्ष 2011 में उन्होंने तलवारबाजी शुरू की। उन्होंने बताया कि वह जन्म से ही 95 प्रतिशत दिव्यांग हैं। दोनों पैर ठीक से काम नहीं करते। इसके बाद राजीव ने पैरा तलवारबाजी की ओर रुख किया। पॉवरलिफ्टिंग से मिली शारीरिक मजबूती और मानसिक दृढ़ता ने उन्हें तलवारबाजी के ट्रैक पर तेजी से आगे बढ़ने में मदद की। दिन-रात की कड़ी मेहनत और कोच के मार्गदर्शन से उन्होंने वर्ष 2012 में उन्होंने प्रदेश स्तर की प्रतियोगिता में अपना पहला पदक जीता था। उन्होंने बताया कि उस समय उनके कोच सत्यवीर सिंह जो मौजूदा समय में जिला खेल अधिकारी है। उनके कहने पर ही उन्होंने तलवारबाजी खेल शुरू किया था। जिसमें उन्होंने पहले राज्य, फिर राष्ट्रीय और अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी पहचान या सुविधा की मोहताज नहीं होती। राष्ट्रमंडल पैरा तलवारबाजी चैंपियनशिप में राजीव ने अपनी गति, सटीक निशाने और बेहतरीन रणनीति से विरोधी खिलाड़ियों को पस्त कर दिया। फाइनल मुकाबले में राजीव का मुकाबला बेहद रोमांचक रहा, जहां उन्होंने अंतिम पलों में अपने विरोधी पर बढ़त बनाते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। उन्होंने बताया कि देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना और राष्ट्रगान की धुन पर तिरंगे को ऊपर उठते देखना मेरी जिंदगी का सबसे गर्व महसूस कराने वाला क्षण था। यह पदक सिर्फ मेरा नहीं, बल्कि उन सभी लोगों का है जिन्होंने हर कठिन परिस्थिति में मेरा साथ दिया। उन्होंने बताया कि पैरा खिलाड़ियों की प्रतिभा एक तरफ जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने और स्थानीय खिलाड़ियों ने खेल व्यवस्था की एक कड़वी सच्चाई को भी उजागर किया है। जिले में जमीनी स्तर पर पैरा खिलाड़ियों के लिए ढांचागत सुविधाओं का घोर अभाव है। उन्होंने बताया कि पैरा फेंसिंग के लिए विशेष प्रकार की व्हीलचेयर, रैंप और आधुनिक तलवारबाजी उपकरणों की आवश्यकता होती है, जो स्थानीय खेल स्टेडियमों में उपलब्ध नहीं हैं। साथ में राजीव ने बताया कि खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की तैयारी और यात्रा के लिए भारी वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सरकारी स्तर पर प्रोत्साहन राशि मिलने में होने वाली देरी खिलाड़ियों का मनोबल तोड़ती है। यदि उन्हें बुनियादी सुविधाएं और आधुनिक प्रशिक्षण समय पर मिले, तो जिले से कई अन्य खिलाड़ी भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश के लिए पदक जीत सकते हैं। उन्होंने बताया कि यदि जिले में पैरा खिलाड़ियों के लिए विशेष ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किया जाए तो खिलाड़ी पैरालंपिक में भी देश का नाम रोशन कर सकता है।

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