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करनाल: जटिल स्पाइन सर्जरी के बाद 22 वर्षीय युवक ने फिर हासिल की चलने की क्षमता, मैक्स अस्पताल में हुआ सफल इलाज

सुनील कुमार Updated Thu, 27 Aug 2026 08:05 PM IST

करनाल - मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग के डॉक्टरों ने 22 वर्षीय युवक का सफलतापूर्वक इलाज किया, जो पिछली स्पाइन सर्जरी के बाद लगातार स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव, रीढ़ की अस्थिरता और बढ़ती स्पाइनल डिफॉर्मिटी से जूझ रहा था। कॉम्प्लेक्स रिवीजन स्पाइन सर्जरी और रिहेबिलिटेशन के बाद मरीज की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ और उसने सहारे से चलने की क्षमता फिर हासिल कर ली। करनाल निवासी मुरबाज सिंह की करीब चार महीने पहले किसी अन्य अस्पताल में स्पाइन सर्जरी हुई थी। इसके बावजूद उनकी परेशानी लगातार बढ़ती रही। उन्हें खड़े होने और चलने में काफी दिक्कत होने लगी। इसके साथ ही दोनों पैरों में कमजोरी और फुट ड्रॉप की समस्या भी विकसित हो गई। इसके बाद उन्हें आगे की जांच और एडवांस्ड इलाज के लिए मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग लाया गया। विस्तृत जांच में स्पाइनल कॉर्ड पर लगातार दबाव, रीढ़ की अस्थिरता और बढ़ती हुई डिफॉर्मिटी सामने आई। डॉक्टरों के अनुसार, मरीज की स्थिति को देखते हुए रीढ़ की विकृति को ठीक करने और उसे स्थिर करने के लिए जटिल रिवीजन सर्जरी जरूरी थी। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग के स्पाइन सर्जरी विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर एवं यूनिट हेड डॉ. जितेश मंधवानी ने बताया कि यह बेहद चुनौतीपूर्ण मामला था। पिछली सर्जरी के बाद मरीज में न्यूरोलॉजिकल लक्षण लगातार बढ़ रहे थे और रीढ़ की अस्थिरता के साथ डिफॉर्मिटी भी विकसित हो रही थी। चलने-फिरने की क्षमता लगातार कम होने के कारण रिवीजन सर्जरी की आवश्यकता पड़ी। उन्होंने बताया कि सर्जरी का मुख्य उद्देश्य स्पाइनल कॉर्ड और नसों पर पड़ रहे दबाव को कम करना, डिफॉर्मिटी को ठीक करना और रीढ़ को स्थिर करना था, ताकि मरीज की मोबिलिटी और क्वालिटी ऑफ लाइफ में सुधार हो सके। मरीज की कॉम्प्लेक्स रिवीजन स्पाइन सर्जरी की गई। इसमें स्पाइनल कॉर्ड और नसों का डिकम्प्रेशन, स्पाइनल डिफॉर्मिटी का करेक्शन तथा रीढ़ की अलाइनमेंट और स्थिरता बहाल करने के लिए स्पाइनल फिक्सेशन एवं फ्यूजन को आगे तक बढ़ाना शामिल था। डॉ. मंधवानी ने कहा कि इस मामले का सबसे उत्साहजनक पहलू सर्जरी के बाद मरीज की धीरे-धीरे हुई न्यूरोलॉजिकल रिकवरी रही। उचित सर्जिकल इंटरवेंशन और रिहेबिलिटेशन के साथ दोनों पैरों की ताकत और मूवमेंट में धीरे-धीरे सुधार हुआ। साथ ही फुट ड्रॉप की समस्या में भी राहत मिली। उन्होंने कहा कि यह मामला दर्शाता है कि जटिल रिवीजन स्पाइन मामलों में समय पर इलाज, विशेषज्ञ सर्जिकल अनुभव और व्यापक रिहेबिलिटेशन कितना महत्वपूर्ण है। सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी गई। नियमित न्यूरोलॉजिकल असेसमेंट के साथ रिहेबिलिटेशन कराया गया। संतोषजनक रिकवरी और स्थिति स्थिर होने के बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डॉक्टरों ने उसे नियमित फिजियोथेरेपी, सही पोस्चर बनाए रखने, गतिविधियों में आवश्यक बदलाव करने और नियमित फॉलो-अप की सलाह दी। अस्पताल के अनुसार, यह मामला जटिल स्पाइनल डिसऑर्डर्स के इलाज में एडवांस्ड स्पाइन केयर, विशेषज्ञता, सावधानीपूर्वक सर्जिकल प्लानिंग और व्यापक रिहेबिलिटेशन के महत्व को दर्शाता है। इन प्रयासों से मरीजों को बेहतर कार्यक्षमता हासिल करने और उनकी क्वालिटी ऑफ लाइफ में सुधार करने में मदद मिल सकती है।

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