भिवानी। किताबों से नाता और मोबाइल से दूरी रखकर रोजाना आठ से दस घंटे की पढ़ाई अतुल कुमार जांगड़ा की सफलता की धूरी बन गई। अतुल ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसका पहला प्रयास ही सिविल सर्विसेज में उसे सफलता दिलाकर 13वां रैंक दिला देगा। अतुल की माता सुमन देवी ने कहा कि बेटे को घर के अंदर पढ़ाई का माहौल दिया तो लाल ने कमाल कर दिया। उसे पढ़ाई के दौरान हर वो चीज मुहैया कराई जाती, जिसकी उसे जरूरत होती थी। बस अतुल ने अपने लक्ष्य पर ही ध्यान केंद्रित रखा, जिसका नतीजा सुखद निकला। वहीं जेबीटी शिक्षक पिता जितेंद्र जांगड़ा ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों पर अपनी अभिलाषाएं और इच्छाएं ना थोपे बल्कि उन्हें आगे बढ़ने के लिए खुले माहौल में प्रोत्साहित करें तो सफलता जरूर मिलेगी। हरियाणा लोक सेवा आयोग की सिविल सर्विसेज परीक्षा में अतुल द्वारा 13वां रैंक प्राप्त किए जाने के बाद परिवार में खुशी का माहौल है और हर कोई बधाई देने पहुंच रहा है। --------------------------------------------------------------- प्रारंभिक शिक्षा से ही अतुल ने प्रथम का नहीं तोड़ा क्रम अतुल जांगड़ा के पिता जितेंद्र जांगड़ा ने बताया कि बेटा प्रारंभिक शिक्षा में हमेशा अव्वल आता था। उसने प्रथम आने का क्रम दसवीं और बारहवीं की परीक्षा में भी नहीं टूटने दिया। इसी का नतीजा रहा कि बेटे ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई थी प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की और फिर सिविल सर्विसेज के पहले प्रयास में ही सफलता को छू लिया। अतुल के पिता जितेंद्र गांव हालुवास देवसर माजरा के राजकीय प्राथमिक पाठशाला में बतौर प्राथमिक शिक्षक तैनात हैं। जितेंद्र करीब 25 सालों से बच्चों को जीवन में आगे बढ़ने का पाठ पढ़ाते आ रहे हैं, जबकि उनके बेटे ने सफलता की नई कहानी लिख डाली है, परिवार में कोई एचसीएस नहीं है। ये पहला मौका है जब उनके परिवार में एक एचसीएस अधिकारी भी बन गया है।