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Iran: अमेरिका-इस्राइल के हमले में ईरान के कितने बड़े चेहरे खत्म? जानें ईरानी सत्ता के धुरंधर कैसे बने निशाना
Sat, 28 Mar 2026 11:34 AM IST
Himanshu Singh Chandel
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
Published by: Himanshu Singh Chandel
Updated Sat, 28 Mar 2026 11:34 AM IST
सार
अमेरिका और इस्राइल के हमलों में ईरान के कई बड़े नेता और सैन्य अधिकारी मारे गए हैं। इसमें खामेनेई, लारीजानी, खातिब और कई शीर्ष कमांडर शामिल हैं। इन हमलों से ईरान का राजनीतिक और सैन्य ढांचा कमजोर हुआ है। ऐसे में आइए जानते हैं कि अमेरिका और इस्राइल ने अब तक कितने ईरानी सत्ता के कितने धुरंधरों को गिराया है।
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खामेनेई
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
ईरान में जारी युद्ध अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां हमले सीधे देश के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बना रहे हैं। अमेरिका और इस्राइल के संयुक्त हमलों में ईरान के कई बड़े राजनीतिक और सैन्य नेता मारे गए हैं। इन हमलों ने सिर्फ सैन्य ताकत ही नहीं, बल्कि ईरान के पूरे सत्ता ढांचे को हिला दिया है। इससे यह साफ हो गया है कि अब रणनीति नेतृत्व को खत्म कर सिस्टम को कमजोर करने की है।
इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत सबसे बड़ा झटका मानी जा रही है। 28 फरवरी को उनके ठिकाने पर हुए हमले में उनकी जान गई। वह 1989 से सत्ता में थे और उन्होंने सुरक्षा तंत्र को मजबूत कर ईरान को क्षेत्रीय ताकत बनाया। लेकिन उनके दौर में अमेरिका और इस्राइल के साथ टकराव भी लगातार बढ़ता रहा।
क्या ईरान की सबसे बड़ी ताकत थे खामेनेई?
खामेनेई ईरान के सबसे शक्तिशाली नेता थे। सेना, खुफिया एजेंसियों और विदेश नीति पर उनका पूरा नियंत्रण था। उनके फैसले ही देश की दिशा तय करते थे। उनकी मौत से सत्ता के केंद्र में बड़ा खालीपन पैदा हो गया है और नेतृत्व की कमान कमजोर पड़ी है।
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अली लारीजानी भी थे अहम
अली लारीजानी 17 मार्च को मारे गए। वह राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख थे और परमाणु वार्ता में अहम भूमिका निभाते थे। वह खामेनेई के करीबी सलाहकार भी थे और ईरान की विदेश और सुरक्षा नीति तय करने में उनका बड़ा योगदान था।
ये भी पढ़ें- ईरान के चक्रव्यूह में घिरा इस्राइल: हिजबुल्ला और हमास के बाद अब यहां से हुए मिसाइल हमले, चौतरफा फंसे नेतन्याहू
खुफिया तंत्र के मुखिया इस्माइल खातिब
इस्माइल खातिब 18 मार्च को इस्राइली हमले में मारे गए। वह ईरान के खुफिया मंत्री थे और देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा की जानकारी जुटाने का काम देखते थे। वह खामेनेई के भरोसेमंद माने जाते थे और खुफिया नेटवर्क के प्रमुख चेहरे थे।
सुरक्षा नीति के अहम खिलाड़ी अली शमखानी
अली शमखानी 28 फरवरी को तेहरान में हुए हमले में मारे गए। वह ईरान की सुरक्षा और परमाणु नीति के बड़े फैसलों में शामिल थे। इससे पहले भी उन पर हमला हुआ था, लेकिन इस बार वह बच नहीं सके।
सैन्य ताकत के प्रमुख थे मोहम्मद पकपुर
मोहम्मद पकपुर आईआरजीसी के प्रमुख थे और 28 फरवरी को हमले में मारे गए। आईआरजीसी ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य इकाई है। पकपुर देश की सैन्य रणनीति और ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे थे।
ये भी पढ़ें- अमेरिका-इस्राइल में दरार?: ईरान युद्ध पर वेंस और नेतन्याहू ने की बात, सत्ता परिवर्तन के दावे पर बढ़ा टकराव
रक्षा नीति के केंद्र में थे अजीज नसीरजादेह
अजीज नसीरजादेह, जो ईरान के रक्षा मंत्री थे, भी उसी हमले में मारे गए। वह सैन्य योजना और रक्षा नीति तैयार करने में अहम भूमिका निभाते थे और वायुसेना से जुड़े अनुभव रखते थे।
सेना की कमान संभाल रहे थे अब्दोलरहीम मौसवी
अब्दोलरहीम मौसवी सेना प्रमुख थे और सभी सैन्य शाखाओं के बीच तालमेल बनाते थे। 28 फरवरी को हुए हमले में उनकी मौत हो गई, जिससे सेना की कमान पर सीधा असर पड़ा।
आंतरिक सुरक्षा के जिम्मेदार गोलामरेजा सोलेमानी
गोलामरेजा सोलेमानी बसीज फोर्स के प्रमुख थे और 17 मार्च को मारे गए। यह फोर्स देश के अंदर कानून व्यवस्था और सरकार की पकड़ बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है।
खुफिया नेटवर्क के धुरंधर रेजाई
बेहनाम रेजाई 26 मार्च को बंदर अब्बास में मारे गए। वह नौसेना खुफिया प्रमुख थे और क्षेत्रीय गतिविधियों पर नजर रखते थे। उनकी मौत से ईरान की समुद्री सुरक्षा और जानकारी जुटाने की क्षमता प्रभावित हुई है।
नौसेना प्रमुख तंगसीरी की हमले में मौत
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के नौसेना प्रमुख अलीरेजा तंगरीसी के अमेरिका-इस्राइल के हमले में मारे जाने की खबर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, बंदर अब्बास के तटीय इलाके में हुए हमले में उनकी मौत हुई थी। तंगसीरी 2018 से इस पद पर थे और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की रणनीति में अहम भूमिका निभा चुके थे।
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इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत सबसे बड़ा झटका मानी जा रही है। 28 फरवरी को उनके ठिकाने पर हुए हमले में उनकी जान गई। वह 1989 से सत्ता में थे और उन्होंने सुरक्षा तंत्र को मजबूत कर ईरान को क्षेत्रीय ताकत बनाया। लेकिन उनके दौर में अमेरिका और इस्राइल के साथ टकराव भी लगातार बढ़ता रहा।
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क्या ईरान की सबसे बड़ी ताकत थे खामेनेई?
खामेनेई ईरान के सबसे शक्तिशाली नेता थे। सेना, खुफिया एजेंसियों और विदेश नीति पर उनका पूरा नियंत्रण था। उनके फैसले ही देश की दिशा तय करते थे। उनकी मौत से सत्ता के केंद्र में बड़ा खालीपन पैदा हो गया है और नेतृत्व की कमान कमजोर पड़ी है।
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अली लारीजानी भी थे अहम
अली लारीजानी 17 मार्च को मारे गए। वह राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख थे और परमाणु वार्ता में अहम भूमिका निभाते थे। वह खामेनेई के करीबी सलाहकार भी थे और ईरान की विदेश और सुरक्षा नीति तय करने में उनका बड़ा योगदान था।
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खुफिया तंत्र के मुखिया इस्माइल खातिब
इस्माइल खातिब 18 मार्च को इस्राइली हमले में मारे गए। वह ईरान के खुफिया मंत्री थे और देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा की जानकारी जुटाने का काम देखते थे। वह खामेनेई के भरोसेमंद माने जाते थे और खुफिया नेटवर्क के प्रमुख चेहरे थे।
सुरक्षा नीति के अहम खिलाड़ी अली शमखानी
अली शमखानी 28 फरवरी को तेहरान में हुए हमले में मारे गए। वह ईरान की सुरक्षा और परमाणु नीति के बड़े फैसलों में शामिल थे। इससे पहले भी उन पर हमला हुआ था, लेकिन इस बार वह बच नहीं सके।
सैन्य ताकत के प्रमुख थे मोहम्मद पकपुर
मोहम्मद पकपुर आईआरजीसी के प्रमुख थे और 28 फरवरी को हमले में मारे गए। आईआरजीसी ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य इकाई है। पकपुर देश की सैन्य रणनीति और ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे थे।
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रक्षा नीति के केंद्र में थे अजीज नसीरजादेह
अजीज नसीरजादेह, जो ईरान के रक्षा मंत्री थे, भी उसी हमले में मारे गए। वह सैन्य योजना और रक्षा नीति तैयार करने में अहम भूमिका निभाते थे और वायुसेना से जुड़े अनुभव रखते थे।
सेना की कमान संभाल रहे थे अब्दोलरहीम मौसवी
अब्दोलरहीम मौसवी सेना प्रमुख थे और सभी सैन्य शाखाओं के बीच तालमेल बनाते थे। 28 फरवरी को हुए हमले में उनकी मौत हो गई, जिससे सेना की कमान पर सीधा असर पड़ा।
आंतरिक सुरक्षा के जिम्मेदार गोलामरेजा सोलेमानी
गोलामरेजा सोलेमानी बसीज फोर्स के प्रमुख थे और 17 मार्च को मारे गए। यह फोर्स देश के अंदर कानून व्यवस्था और सरकार की पकड़ बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है।
खुफिया नेटवर्क के धुरंधर रेजाई
बेहनाम रेजाई 26 मार्च को बंदर अब्बास में मारे गए। वह नौसेना खुफिया प्रमुख थे और क्षेत्रीय गतिविधियों पर नजर रखते थे। उनकी मौत से ईरान की समुद्री सुरक्षा और जानकारी जुटाने की क्षमता प्रभावित हुई है।
नौसेना प्रमुख तंगसीरी की हमले में मौत
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के नौसेना प्रमुख अलीरेजा तंगरीसी के अमेरिका-इस्राइल के हमले में मारे जाने की खबर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, बंदर अब्बास के तटीय इलाके में हुए हमले में उनकी मौत हुई थी। तंगसीरी 2018 से इस पद पर थे और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की रणनीति में अहम भूमिका निभा चुके थे।
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