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Hindi News ›   World ›   Iran Economic Pressure: EU Joins US-Led Operation Economic Outcast, What Does It Mean for Tehran?

ईरान के खिलाफ अमेरिका और यूरोपीय संघ आए साथ: तेल और वित्तीय नेटवर्क पर कसा शिकंजा, क्या बढ़ेगा आर्थिक संकट?

Fri, 04 Sep 2026 08:17 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Fri, 04 Sep 2026 08:17 AM IST
सार

अमेरिका ने ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट शुरू किया था, अब यूरोपीय संघ भी इसके साथ खड़ा नजर आ रहा है। ईरान के तेल, वित्तीय नेटवर्क और जहाजरानी पर दबाव बढ़ सकता है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह आर्थिक घेराबंदी ईरान को झुकाएगी या पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ेगा? होर्मुज जलडमरूमध्य पर इसका असर कितना गंभीर हो सकता है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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Iran Economic Pressure: EU Joins US-Led Operation Economic Outcast, What Does It Mean for Tehran?
ईरान के सामने अब कौन-कौन सी चुनौतियां? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि यूरोपीय संघ आधिकारिक तौर पर ईरान के खिलाफ अमेरिका के नेतृत्व वाले ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट में शामिल हो गया है। यह अभियान ईरान को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था से अलग करने और उसकी कमाई के उन रास्तों को रोकने पर केंद्रित है, जिनका इस्तेमाल अमेरिका के अनुसार परमाणु कार्यक्रम, हथियारों और आतंकवादी संगठनों के समर्थन के लिए किया जाता है। यूरोपीय संघ ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की तैयारी जताई है, लेकिन साथ ही कूटनीतिक समाधान और तनाव कम करने पर भी जोर दिया है।

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यूरोपीय संघ ने ईरान के खिलाफ क्या रुख अपनाया है?

बेसेंट ने कहा कि यूरोपीय संघ ने ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट में आधिकारिक रूप से शामिल होने की इच्छा जताई है और अमेरिका ने उसके शुरुआती कड़े रुख का स्वागत किया है। ईयू ने कहा कि ईरान को अपने परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर रोक लगानी चाहिए। साथ ही उस पर क्षेत्र और यूरोप में अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियां रोकने, यूक्रेन में रूस के युद्ध को सैन्य समर्थन बंद करने और अपने नागरिकों के खिलाफ हिंसा तथा दमन खत्म करने का दबाव बनाया गया है।

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अमेरिका का ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट आखिर क्या है?

अमेरिका ने पिछले महीने यह अभियान शुरू किया था। इसका मुख्य उद्देश्य ईरान को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क से काटना और उसकी आय के स्रोतों को सीमित करना है। अमेरिका ने ईरान से जुड़े तेल नेटवर्क और प्रतिबंधों से बचने के तरीकों की पहचान करने की बात कही थी। इसके साथ डिजिटल संपत्ति, तकनीक और जहाजरानी से जुड़ी ईरान की गतिविधियों पर भी संभावित प्रतिबंधों के दायरे का विस्तार किया गया है। बेसेंट ने ईरान के सामने वैश्विक अलगाव या वैश्विक अर्थव्यवस्था में लौटने का रास्ता चुनने की बात कही थी।

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होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईयू ने क्या कहा?

यूरोपीय संघ ने कहा कि कूटनीतिक प्रयास जारी रहना जरूरी है, ताकि शांति समझौता हो सके और पश्चिम एशिया में स्थिरता लौटे। ईयू ने खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की स्वतंत्र आवाजाही और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उसने कहा कि अपनी सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर वह आगे भी कदम उठा सकता है। ईयू ने ईरान पर पहले से लगाए गए व्यापक प्रतिबंधों का भी उल्लेख किया।

ईरान पर दबाव और बढ़ेगा, लेकिन क्या कूटनीति भी जारी रहेगी?

ईयू ने कहा कि वह अमेरिका, जी7 और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखेगा। हालांकि, उसके रुख में सैन्य या आर्थिक दबाव के साथ बातचीत का रास्ता खुला रखने की बात भी साफ है। ईयू का कहना है कि ईरान को अपनी अस्थिरता पैदा करने वाली गतिविधियां रोककर सद्भावना के साथ शांति वार्ता में शामिल होना चाहिए। ऐसे में ईरान के खिलाफ पश्चिमी देशों का आर्थिक मोर्चा मजबूत होने के साथ कूटनीतिक प्रयास भी जारी रहने की संभावना है।

ईरान के सामने अमेरिका ने कौन से विकल्प रखे हैं?

अमेरिका के अनुसार ईरान के सामने दो रास्ते हैं। पहला, वैश्विक अलगाव और बेहद सीमित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ना और दूसरा, सामान्य स्थिति की ओर लौटना तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था में फिर से शामिल होने का अवसर हासिल करना। बेसेंट के मुताबिक अमेरिका का लक्ष्य ईरानी सरकार को बनाए रखने वाले हर आर्थिक सहारे को खत्म करना है। ईयू के जुड़ने से वाशिंगटन के आर्थिक दबाव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूती मिलने का संकेत मिला है।

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