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वैकल्पिक मार्ग निर्माण के नामपर काटे हरे पेड़, काम भी किया बंद
Updated Sun, 08 Oct 2017 10:47 PM IST
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बड़कोट। यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग के ओजरी क्षेत्र में बन रहे वैकल्पिक मार्ग के नाम पर दर्जनों हरे पेड़ों की बली चढ़ा दी गई है। लोनिवि ने ओजरी से तिर्खली की तरफ बनने वाले स्थायी वैकल्पिक मार्ग के निर्माण के लिए इन पेड़ों को काटा था। हालांकि, विभाग अब इस मार्ग का कार्य बंद करके, अस्थायी मार्ग के निर्माण में लगा हुआ है। ऐसे में बिना किसी उद्देश्य के काटे गए पेड़ों को लेकर वन विभाग भी अनजान बना हुआ है।
यमुनोत्री राजमार्ग बंद होने के बाद प्रशासन द्वारा इस मार्ग को तैयार कराने की योजना बनाई गई थी जिस पर, वन विभाग द्वारा वैकल्पिक मार्ग निर्माण के लिए किसी भी पेड़ को काटने से मना किया गया था, लेकिन लोनिवि ने तिर्खली गांव में करीब 300 मीटर मार्ग बनाने के नाम पर बांज, बुरांश के कई पेड़ काटने के साथ ही 19 नाली कृषि भूमि भी तबाह कर दी। वहीं, ओजरी गांव के ग्रामीणों द्वारा विरोध करने पर निर्माण कार्य रोक भी दिया गया। इसके कारण तिर्खली के ग्रामीणों को सड़क तो मिली नहीं, उल्टा उनके खेत और वन भी बर्बाद हो गए।
तिर्खली गांव की प्रधान बालम देवी ने कहा कि इस स्थायी मार्ग के बनने से ओजरी स्लाइड जोन से हमेशा के लिए राहत मिल सकती थी। इसी वजह से ग्रामीणों ने विभाग को कृषि भूमि पर काम करने दिया था, लेकिन विभाग ने सड़क का काम बंद कर दिया और नुकसान का मुआवजा भी नहीं दिया गया।
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उधर, डीएफओ जेपी सिंह ने कहा कि उन्हें पेड़ कटने के बारे में कोई जानकारी नहीं है। वैकल्पिक मार्ग निर्माण के दौरान पेड़ नहीं काटे जाने के आदेश दिए गए थे। जल्द ही मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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यमुनोत्री राजमार्ग बंद होने के बाद प्रशासन द्वारा इस मार्ग को तैयार कराने की योजना बनाई गई थी जिस पर, वन विभाग द्वारा वैकल्पिक मार्ग निर्माण के लिए किसी भी पेड़ को काटने से मना किया गया था, लेकिन लोनिवि ने तिर्खली गांव में करीब 300 मीटर मार्ग बनाने के नाम पर बांज, बुरांश के कई पेड़ काटने के साथ ही 19 नाली कृषि भूमि भी तबाह कर दी। वहीं, ओजरी गांव के ग्रामीणों द्वारा विरोध करने पर निर्माण कार्य रोक भी दिया गया। इसके कारण तिर्खली के ग्रामीणों को सड़क तो मिली नहीं, उल्टा उनके खेत और वन भी बर्बाद हो गए।
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तिर्खली गांव की प्रधान बालम देवी ने कहा कि इस स्थायी मार्ग के बनने से ओजरी स्लाइड जोन से हमेशा के लिए राहत मिल सकती थी। इसी वजह से ग्रामीणों ने विभाग को कृषि भूमि पर काम करने दिया था, लेकिन विभाग ने सड़क का काम बंद कर दिया और नुकसान का मुआवजा भी नहीं दिया गया।
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उधर, डीएफओ जेपी सिंह ने कहा कि उन्हें पेड़ कटने के बारे में कोई जानकारी नहीं है। वैकल्पिक मार्ग निर्माण के दौरान पेड़ नहीं काटे जाने के आदेश दिए गए थे। जल्द ही मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।