{"_id":"ab90a2a15eca953743b09375f9b1c65b","slug":"davory-murderd-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दहेज हत्या में चार लोगों को उम्रकैद","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
दहेज हत्या में चार लोगों को उम्रकैद
ब्यूरो/अमर उजाला, काशीीर (ऊधमसिंह
Updated Sat, 31 Jan 2015 06:37 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने दहेज हत्या में एक महिला सहित चार लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक दोषी को 20-20 हजार रुपया अर्थदंड किया।
शनिवार को अपर सत्र न्यायाधीश शंकरराज की अदालत ने दहेज हत्या के आरोप में सुभाषनगर निवासी दिलबाग सिंह, सुखविंदर सिंह पुत्रगण गुलशन सिंह, गुलशन सिंह पुत्र चंदन सिंह, सुरजीत कौर पत्नी गुलशन सिंह को दोषी पाया और सजा सुनाई।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 18 जुलाई 2009 को बाजपुर निवासी मौता सिंह कलसी ने पुलिस में दर्ज रिपोर्ट में कहा कि उसकी पुत्री रंजीत कौर का विवाह 20 मई 2007 को सुभाषनगर काशीपुर निवासी दिलबाग सिंह के साथ हुआ था। विवाह के बाद से ही दिलबाग और उसका परिवार दो लाख रुपए की मांग को लेकर रंजीत कौर से मारपीट करने लगे। रंजीत कौर ने 14 जुलाई 2009 को उसे फोन पर बताया कि उसकी जान को खतरा है।
विज्ञापन
18 जुलाई की शाम छह बजे किसी ने फोन पर बताया कि उसकी पुत्री की हत्या कर दी गई है। अदालत ने बचाव पक्ष के वकील और शासकीय अधिवक्ता संतोष नकवी के तर्क सुने तत्थों का विश्लेषण करने पर अभियुक्तों द्वारा रस्सी से रंजीत कौर का गला घोंटकर हत्या करने का दोष सिद्ध पाया और फैसला सुनाया।
विज्ञापन
शनिवार को अपर सत्र न्यायाधीश शंकरराज की अदालत ने दहेज हत्या के आरोप में सुभाषनगर निवासी दिलबाग सिंह, सुखविंदर सिंह पुत्रगण गुलशन सिंह, गुलशन सिंह पुत्र चंदन सिंह, सुरजीत कौर पत्नी गुलशन सिंह को दोषी पाया और सजा सुनाई।
विज्ञापन
अभियोजन पक्ष के अनुसार 18 जुलाई 2009 को बाजपुर निवासी मौता सिंह कलसी ने पुलिस में दर्ज रिपोर्ट में कहा कि उसकी पुत्री रंजीत कौर का विवाह 20 मई 2007 को सुभाषनगर काशीपुर निवासी दिलबाग सिंह के साथ हुआ था। विवाह के बाद से ही दिलबाग और उसका परिवार दो लाख रुपए की मांग को लेकर रंजीत कौर से मारपीट करने लगे। रंजीत कौर ने 14 जुलाई 2009 को उसे फोन पर बताया कि उसकी जान को खतरा है।
विज्ञापन
18 जुलाई की शाम छह बजे किसी ने फोन पर बताया कि उसकी पुत्री की हत्या कर दी गई है। अदालत ने बचाव पक्ष के वकील और शासकीय अधिवक्ता संतोष नकवी के तर्क सुने तत्थों का विश्लेषण करने पर अभियुक्तों द्वारा रस्सी से रंजीत कौर का गला घोंटकर हत्या करने का दोष सिद्ध पाया और फैसला सुनाया।