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अटल आयुष्मान में धांधली पर मल्टीस्पेशलिस्ट हॉस्पिटल की सूचीबद्धता निलंबित

Wed, 24 Apr 2019 12:13 AM IST
अरुण कुमार अमर उजाला ब्यूरो 
अमर उजाला ब्यूरो  Published by: अरुण कुमार Updated Wed, 24 Apr 2019 12:13 AM IST
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Atal Ayushman suspended the registration of multispecialist hospital on rigging
काशीपुर में टीम से बात करने पहुंचा टीवी का मरीज। - फोटो : अमर उजाला

\अटल आयुष्मान योजना में कथित रूप से अनियमितताएं बरतने और अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करने पर काशीपुर के एक मल्टी स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल और न्यूरो ट्रॉमा सेंटर को निलंबित कर दिया है। साथ ही इस योजना के तहत किए गए उपचार के देयकों के भुगतान पर भी रोक लगा दी है। 

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अटल आयुष्मान योजना (उत्तराखंड) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी युगल किशोर सिंघल ने मंगलवार को आयोजित आदेश में कहा कि जसपुर मार्ग पर सहोता मल्टी स्पेशलिस्ट एवं न्यूरो ट्रॉमा सेंटर अटल आयुष्मान योजना के तहत सूचीबद्ध है। इस अस्पताल में पंजीकृत चिकित्सकों की संख्या नौ हैं। इनमें अस्पताल संचालक की पत्नी स्त्री रोग विशेषज्ञ है, जो काशीपुर के राजकीय चिकित्सालय में एलोपैथिक चिकित्सक के रूप में तैनात है। 
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हॉस्पिटल की ओर से आठ अप्रैल 2019 तक 93 केस का क्लेम प्रस्तुत किया गया। इसमें नौ केस सिजेरियन, 21 केस नवजात शिशुओं से संबंधित, 35 केस डायलिसिस, सात केस कैटरेक्ट से संबंधित थे। नशा देने वाले चिकित्सक की उपलब्धता न होने के कारण सिजेरियन के नौ में से तीन केस राजकीय चिकित्सालय से मल्टी स्पेशलिस्ट ट्रॉमा सेंटर को रेफर कर दिए गए।
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इसी दिन दोपहर दो बजे बाद उक्त हॉस्पिटल में दो सिजेरियन हॉस्पिटल किए गए। स्त्री रोग विशेषज्ञ की ओर से दो प्रसूताओं की पूर्ण जांचें राजकीय चिकित्सालय में की गई, जबकि उनका प्रसव मल्टी स्पेशलिस्ट अस्पताल में हुआ। जांच में पता लगा कि महिला चिकित्सक की ओर से अनैतिक लाभ प्राप्त करने के लिए मरीजों को मल्टी स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल में भेजा गया।

हॉस्पिटल की ओरसे आठ अप्रैल तक क्लेमस कैटरेक्ट सर्जरी के छह केस प्रस्तुत किए गए। इसमें से छह केस में प्रति मरीज 9000 से 10000 तक अतिरिक्त क्लेम की धनराशि प्राप्त की गई है। सीईओ सिंघल ने बताया कि आयुष्मान योजना की शर्तों और अनुबंधों का उल्लंघन करने पर मल्टीस्पेशलिस्ट हॉस्पिटल और ट्रॉमा सेंटर की सूचीबद्धता निलंबित कर दी गई है। साथ ही हॉस्पिटल की लोगिंन को राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभिकरण के सिस्टम से तत्काल ब्लॉक कर दिया है। 

उन्होंने बताया कि इस मामले में जांच के लिए राज्य स्वास्थ्य अभिकरण के सहायक निदेशक डॉ. अमलेश कुमार सिंह व क्रियान्वयन सहायता समिति के मेडिकल ऑफिसर डॉ. मदन मोहन को जांच सौंपी गई है। समिति से 15 दिनों में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। 


किसी ने षड्यंत्र के तहत अस्पताल को बदनाम करने की नियत से शिकायत की है। अभी इन आरोपों पर जांच होनी बाकी है। कहा कि सभी आरोप बेबुनियाद हैं। जांच टीम अस्पताल में आकर जांच कर सकती है। इस मामले में उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
- डॉ. रवि सहोता, संचालक, सहोता मल्टी स्पेशलिस्ट एवं न्यूरो ट्रॉमा सेंटर।

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