{"_id":"5a6238f24f1c1b8d268b551b","slug":"asha-workers-protest-for-the-wages","type":"story","status":"publish","title_hn":"वेतन की आस में आशाएं धरने पर ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
वेतन की आस में आशाएं धरने पर
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, ऊध्ामसिंह नगर
Updated Sat, 20 Jan 2018 12:03 AM IST
विज्ञापन
जिला अस्पताल में धरने पर बैठी आशा कार्यकर्ता और फैसिलिटेटर।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीएमओ कार्यालय के अधीन आने के बाद जिले की आशा फैसिलिटेटर और ब्लॉक समन्वयकों का तीन महीने का वेतन लटक गया है। इसके साथ ही आशा कार्यकर्ताओं की भी कई मांगों को स्वास्थ्य विभाग अभी तक पूरी नहीं कर सका है। इन मांगों को लेकर उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ अस्पताल परिसर में धरना देकर डीएम के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा।
विज्ञापन
शुक्रवार को जिला अस्पताल में धरने पर बैठीं आशा फैसिलिटेटर, ब्लॉक समन्वयक और आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि लगातार उनकी मांगों की अनदेखी की जा रही है। सरकार ने आशा कार्यकर्ताओं को 2000 रुपये मानदेय और 5000 रुपये वार्षिक प्रोत्साहन देने का वादा अभी तक पूरा नहीं किया है। आशा फैसिलिटेटर सरिता गुप्ता ने कहा कि जिले में सभी आशा फैसिलिटेटर और ब्लॉक समन्वयकों को जून, जुलाई और अगस्त का वेतन नहीं मिला है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से ब्लॉक समन्वयकों को 10,419 रुपये और आशा फैसिलिटेटर को 5,789 रुपये मानदेय मिलता है।
विज्ञापन
एनजीओ इंपार्ट के बाद उनके सीएमओ कार्यालय के अधीन के कारण उनका वेतन रुक गया है। उन्होंने राज्य कर्मचारियों का दर्जा देने और राज्य मद से 2000 रुपये मानदेय तय करने, पेंशन, नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा और बिना शर्त बीमा कराने की मांग की। प्रमुख अधीक्षक डॉ. अमीता उप्रेती ने कार्यकर्ताओं से वार्ता कर उनकी समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया। वहां रीता कश्यप, सुशीला अरोरा, पुष्पा रानी, कमलेश अरोरा, ममता रानी, नीलम, सीमा मिगलानी, गायत्री वैद्य, किरन रस्तोगी, पूनम कश्यप, ममता अरोरा, सपना शर्मा आदि थे।
विज्ञापन