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राज्य के चार लाख बच्चों को नहीं मिल रहा बाल पालाश योजना का लाभ

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 19 Sep 2021 12:26 AM IST
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Children are not getting profit of scheme.
आशीष भटगांई, मुख्य विकास अधिकारी। - फोटो : RUDRAPUR
महिला एवं बाल विकास विभाग की बाल पालाश योजना का लाभ राज्य के चार लाख 23 हजार 811 बच्चों को नहीं मिल पा रहा है। मार्च-2020 से राज्य के 20 हजार 67 आंगनबाड़ी केंद्र बंद पड़े हैं। बाल पालाश योजना के तहत तीन से छह साल तक के बच्चों को सप्ताह में दो दिन उबला अंडा और दो दिन केले दिए जाते थे।
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आंगनबाड़ी केंद्रों में तीन से छह वर्ष के बच्चों को कुक्ड फूड दिया जाता है। इसमें नाश्ते के साथ ही दोपहर का भोजन दिया जाता है। इसी के साथ ही बच्चों को उबला अंडा व केले दिए जा रहे थे, लेकिन कोरोना काल से बंद पड़े आंगनबाड़ी केंद्रों में अब यह योजना ठप पड़ी हुई है।
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आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की ओर से सिर्फ बच्चों को घर-घर जाकर टीएचआर व ऊर्जा पाउडर दिया जा रहा है। केंद्र सरकार की ओर से बजट नहीं मिलने पर योजना धरी की धरी रह गई है। जिले की 10 परियोजनाओं में 2387 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इसमें तीन वर्ष से छह वर्ष तक के 53 हजार 292 बच्चे पंजीकृत हैं। बाल पलाश योजना के साथ ही बच्चों को आंचल अमृत योजना से मिलने वाला 100 ग्राम प्रति बच्चे के हिसाब से दूध भी नहीं मिल पा रहा है।
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कोरोना संक्रमण के चलते आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को नहीं बुलाया जा रहा है। सरकार की ओर से बाल पालाश योजना और आंचल अमृत योजना का बजट जारी किया जाएगा, तो बच्चों को इन योजनाओं का लाभ जरूर मिलेगा। -आशीष भटगांई, सीडीओ।
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