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तराई में शराब की 85 दुकानों पर करीब 30 करोड़ बकाया
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रुद्रपुर। तराई में शराब का कारोबार कर रहीं दुकानें समय पर टैक्स जमा नहीं कर रही हैं जिससे दुकानों पर बकाया अधिभार बढ़ता जा रहा है। विभाग की ओर से इन्हें बार-बार नोटिस दिए जा रहे हैं लेकिन बकाया धनराशि जमा नहीं की जा रही है।
तराई में देसी व अंग्रेजी शराब के करीब 100 सरकारी ठेके हैं। शराब की दुकानों पर बिक्री तो काफी हो रही है लेकिन सरकार के हिस्से में जमा होने वाले रुपये बकाया होता जा रहा है। जिले में शराब की 85 दुकानों पर करीब 30 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि बकाया है। बकाए की वसूली के लिए आबकारी विभाग की ओर से नोटिस देने की कार्रवाई जारी है।
जिला आबकारी अधिकारी हरीश कुमार ने बताया कि कई बार नोटिस भेजने के बाद भी रुपये जमा नहीं हो पा रहे हैं। बताया कि शराब की दुकानों पर बकाया अधिभार तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि करीब 15 दुुकानें ही ऐसी हैं जहां किसी तरह का बकाया नहीं है। इधर शराब कारोबारी सरकार की दोहरी नीति को इसके लिए जिम्मेदार बता रहे हैं। एक कारोबारी ने बताया कि उत्तराखंड की अपेक्षा यूपी मेें शराब सस्ती है जिससे लोग सीमावर्ती क्षेत्र से शराब खरीदकर पी रहे हैं। ऐसे में सभी दुकानदारों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
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तराई में देसी व अंग्रेजी शराब के करीब 100 सरकारी ठेके हैं। शराब की दुकानों पर बिक्री तो काफी हो रही है लेकिन सरकार के हिस्से में जमा होने वाले रुपये बकाया होता जा रहा है। जिले में शराब की 85 दुकानों पर करीब 30 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि बकाया है। बकाए की वसूली के लिए आबकारी विभाग की ओर से नोटिस देने की कार्रवाई जारी है।
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जिला आबकारी अधिकारी हरीश कुमार ने बताया कि कई बार नोटिस भेजने के बाद भी रुपये जमा नहीं हो पा रहे हैं। बताया कि शराब की दुकानों पर बकाया अधिभार तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि करीब 15 दुुकानें ही ऐसी हैं जहां किसी तरह का बकाया नहीं है। इधर शराब कारोबारी सरकार की दोहरी नीति को इसके लिए जिम्मेदार बता रहे हैं। एक कारोबारी ने बताया कि उत्तराखंड की अपेक्षा यूपी मेें शराब सस्ती है जिससे लोग सीमावर्ती क्षेत्र से शराब खरीदकर पी रहे हैं। ऐसे में सभी दुकानदारों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
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