फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   People made three km of canals from Shramdan

लोगों ने श्रमदान से तीन किमी नहर बनाई

Sun, 23 Apr 2017 10:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, डीडीहाट
ब्यूरो/अमर उजाला, डीडीहाट Updated Sun, 23 Apr 2017 10:35 PM IST
विज्ञापन
People made three km of canals from Shramdan
डीडीहाट के खोड़ गांव के लिए श्रमदान से नहर बनाते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला

तहसील मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर ननपापू ग्राम पंचायत के खोड़ गांव के लोगों ने अपनी सौ नाली जमीन की सिंचाई करने के लिए खुद ही तीन किलोमीटर नहर का निर्माण कर दिया है। श्रमदान में गांव के लोगों को 15 दिन का समय लगा। तीन किलोमीटर दूर चिरकटिया के जंगल में बेकार बहने वाले पानी को जब लोगों ने अपनी मेहनत से खेतों तक पहुंचाया तो लोग खुशी से झूम उठे। इन खेतों में इसी पानी से धान की नर्सरी लगाने का काम शुरू हो गया है। पहली बार गांव के लोग अपनी सौ नाली जमीन में धान की रोपाई भी लगाएंगे।

विज्ञापन


खोड़ गांव के लोग 25 वर्ष से सिंचाई नहर की मांग उठा रहे थे। सरकार ने कभी भी इनकी मांग पर गौर नहीं किया। जब सरकार से उम्मीद खत्म हो गई तो लोगों ने खुद ही नहर बनाने की ठान ली। साथ ही यह भी तय कर लिया कि खेतों तक अपने दम पर पानी पहुंचाएंगे। खोड़ गांव से तीन किलोमीटर दूर चिरकटिया जंगल में बहने वाले छोटे से नाले में पर्याप्त पानी है। यह पानी गर्मियों में भी कम नहीं होता। खोड़ गांव के नरेंद्र सिंह कन्याल ने बताया कि श्रमदान में हर परिवार के लोगों ने हिस्सा लिया, जो लोग श्रमदान में शामिल हो पाने की स्थिति में नहीं थे, उन्होंने आर्थिक सहयोग दिया। शनिवार की शाम तीन किलोमीटर लंबी इस नहर का निर्माण कार्य पूरा हुआ और खेतों में पानी पहुंच गया।
विज्ञापन


रविवार की सुबह से लोग खेतों में धान की नर्सरी लगाने के काम में जुट गए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकार से और उम्मीद रखते तो शायद नहर के लिए 25 साल और इंतजार करना पड़ता। गांव के लोगों ने तीन किलोमीटर नहर बनाने में जिस तकनीक का प्रयोग किया है वह इंजीनियरों के लिए भी चुनौती है। नहर में कहीं पर भी सीमेंट और ईंट का प्रयोग नहीं किया गया है। सिर्फ मिट्टी और पत्थरों की मदद से नहर तैयार की गई है। इसमें कहीं पर भी पानी की एक बूंद लीकेज नहीं हो रही है। बताया गया कि गांव की इस जमीन पर कभी भी पानी नहीं पहुंचा था। इस कारण लोग चाहते हुए भी धान की रोपाई नहीं कर पाते थे। अब किसानों को रबी और खरीफ दोनों फसलों के लिए इस नहर से खेतों में पानी मिलता रहेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed