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नहीं हुए विस्थापन के लिए ठोस इंतजाम

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 02 Jun 2021 12:01 AM IST
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No Visthapan in Bangapani
बंगापानी (पिथौरागढ़)। मानसून इसी माह आने वाला है, लेकिन आपदा में घरों और जमीनों के साथ अपनों को खोने वाले परिवारों के विस्थापन के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं हो पाए हैं। एक आसमानी आफत का मुकाबला कर चुके लोग गिरताऊ घरों में रहने में डर रहे हैं।
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बंगापानी तहसील में वर्ष 2020 में प्रकृति ने जमकर कहर बरपाया था। टांगा गांव में 11 लोगों की मौत हो गई थी। गैला, लोदीबगड़, हुड़की, भ्यूला, मोरी क्षेत्र के कई गांवों में भी कई मकान जमींदोज हो गए थे। पूरे गांवों के खतरे में आने के कारण मकान रहने लायक नहीं हैं।
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सरकार की ओर से 19 परिवार मोरी, तीन गैला, सात लोदी बगड़, चार हुड़की, 56 परिवार टांगा, तीन भ्यूला, एक कनार, एक बाता, उमडांडा के एक परिवार को राहत के तौर पर 1.1 लाख रुपये मिले हैं। जमीन के दरक जाने के कारण इन परिवारों का दूसरे स्थान पर विस्थापित होना जरूरी है।
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इसके लिए प्रशासन की ओर से कुछ स्थानों पर जमीन चयनित की गई लेकिन प्रशासन का कहना है कि आपदा प्रभावित परिवारों को दूसरी जगह जमीन पसंद नहीं आ रही है। ज्यादातर परिवार अपने पुरखों की जमीन छोड़कर दूसरे स्थान पर नहीं जाना चाहते हैं। इन परिवारों की मांग यह भी है कि उन्हें पैकेज दिया जाय ताकि वे अपनी पसंदीदा जगह पर समय से मकान बनाकर जीवनयापन कर सकें।
तहसील प्रशासन के अनुसार टांगा में 56 में से केवल छह परिवार विस्थापन के लिए तैयार हैं। जबकि बांकी पैकेज मांग रहे हैं। प्रशासन के अनुसार कुछ परिवारों ने जमीन संबंधी जरूरी प्रपत्र उपलब्ध नहीं कराए हैं। मोरी में 19 में से तीन परिवार, मल्ला मोरी में चार परिवार, बरम कलिका में दो, मेतली के चार परिवारों में से दो परिवारों के लिए बरम में भूमि चयनित हो गई है।
विस्थापन में हो रही देरी से आपदा प्रभावितों में एक बार फिर डर का माहौल है। प्रभावितों का कहना है कि गांवों के ऊपरी और निचले हिस्सों में पिछले साल भारी भूस्खलन हुआ है। ऐसे में तेज बारिश होने पर भविष्य में फिर से आपदा का खतरा बना रहेगा। इन गांवों में कुछ परिवार ऐसे भी हैं जिन्हें सरकार की ओर से कोई राहत राशि नहीं मिल पाई है।
सरकार की ओर से सभी आपदा प्रभावितों को उचित राशि मिलनी चाहिए ताकि अपनी सुविधा के अनुसार किसी सुरक्षित स्थान पर घर बना सकें।
- सुरेश सिंह, निवासी मोरी गांव।
दूसरा वर्षाकाल शुरू होने वाला है। कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है। मकान संपूर्ण बताकर उन्हें क्षति का मुआवजा तक नहीं मिला। मकान जरूर पूरा है लेकिन बरसात में रहने लायक नहीं है।

-रुद्र सिंह, मोरी गांव।
आपदा प्रभावित परिवारों के लिए जमीन चयनित की गई है। कुछ परिवारों को चयनित की गई जमीन पसंद नहीं आ रही है। कई परिवार ऐसे हैं जो पैकेज की मांग कर रहे हैं। आपदा से खतरे की जद में आए परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर विस्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है।
-अबरार अहमद, तहसीलदार बंगापानी।
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