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मिलम के लिए ट्रैकरों का जाना शुरू
अमर उजाला/ब्यूरो/ मुनस्यारी (पिथौरागढ़)।
Updated Fri, 19 Jun 2015 12:04 AM IST
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मिलम ग्लेशियर के लिए ट्रैकरों का आवागमन शुरू हो गई है। अब तक 214 देसी और 7 विदेशी पर्यटक मिलम की यात्रा पर जा चुके हैं। मिलम के स्थायी लोग भी माइग्रेशन से लौटकर गांव वापसी करने लगे हैं।
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मिलम गांव के आसपास की बर्फ तो अब पिघल गई है लेकिन स्नो लाइन गांव को टच कर निकलती है। बारिश का मौसम शुरू होने तक इस रूट पर ट्रैकिंग जारी रहेगी।
उसके बाद मिलम जाने के लिए सबसे बेहतरीन मौसम सितंबर में माना जाता है। मिलम के लिए ट्रैकरों की आवाजाही पांच मई से शुरू हुई। अभी भी ट्रैकरों और पर्यटकों की आवाजाही का क्रम जारी है।
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मुनस्यारी तहसील मुख्यालय से 64 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मिलम ग्लेशियर के लिए सड़क का निर्माण कार्य पिछले पांच साल से चल रहा है लेकिन सड़क पूरा होने में कम से कम पांच साल का समय और लग जाएगा।
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ऐसे में ट्रैकिंग पर जाने वाले पैदल रास्ते का ही इस्तेमाल करते हैं। बुर्फू, बोगड्यार, लीलम होते हुए मिलम जाने में कई स्थानों पर रास्ता खतरनाक है।
ट्रैकरों, मिलम रूट में सामान ढोने का काम करने वाले ठेकेदारों का कहना है कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मानसून की बारिश जल्दी शुरू होकर जल्दी समाप्त हो जाती है।
ऐसे में बारिश के समय इतनी कठिन स्थान की यात्रा नहीं की जानी चाहिए। इस समय हालांकि मिलम वाले रास्ते में मौसम सुहावना है लेकिन बारिश शुरू होते ही पैदल रास्ते बंद हो जाएंगे।
मिलम को सामान ढोने वाले ठेकेदार कुंदन सिंह पांगती का कहना है कि इस समय घोड़ों और खच्चरों से सामान का ढुलान किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस महीने बड़ी संख्या में ट्रैकर और स्थानीय लोग मिलम गए हैं। एसडीएम कौस्तुभ मिश्रा ने बताया कि मिलम जाने वाले ट्रैकरों और पर्यटकों का पूरा लेखाजोखा रखा जाता है।
मिलम जाने से पहले इनको सारी सूचनाएं तहसील कार्यालय में देनी पड़ती है। मिलम के लिए हेलीकाप्टर सेवा संचालित होने में संशय बना हुआ है।
सरकार ने सिर्फ एक दिन के लिए मिलम तक हेलीकाप्टर सेवा शुरू की थी। तब से सेवा बंद है। एसडीएम कौस्तुभ मिश्रा का कहना है कि हेलीकाप्टर के लिए ईंधन की समस्या आ रही है। यदि ईंधन मिल जाता है तो सेवा फिर से शुरू कर दी जाएगी।