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मान्यता नहीं मिलने से प्रथम वर्ष में प्रवेश पर असमंजस

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 21 Sep 2022 10:54 PM IST
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Confusion over admission in the first year due to non-recognition
नन्हीं परी सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज पिथौरागढ़। संवाद - फोटो : PITHORAGARH
पिथौरागढ़। नन्हीं परी सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज के आल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजूकेशन (एआईसीटीई) के मानकों को पूरा नहीं करने पर प्रथम वर्ष में छात्र-छात्राओं को प्रवेश मिलने में असमंजस है। वहीं द्वाराहाट और टनकपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में सीटें फुल होने से छात्र-छात्राएं परेशान हैं। उन्हें मजबूरन निजी कॉलेजों में जाना पड़ रहा है।
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पिथौरागढ़ में वर्ष 2011 में नन्हीं परी सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज को सरकार से स्वीकृति मिली थी। उस समय कॉलेज को वीर बहादुर तकनीकी विश्वविद्यालय के संघटक कॉलेज की मान्यता दी गई जिसके बाद कॉलेज में प्रथम वर्ष की कक्षाओं का संचालन किया गया। उस समय सरकार ने कॉलेज के नए भवन के निर्माण के लिए करीब 23 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। आईटीआई में जगह कम होने के कारण कॉलेज को दिव्यांग भवन और बाद में केएनयू जीआईसी में शिफ्ट किया गया। तब से कॉलेज केएनयू जीआईसी में ही संचालित किया जा रहा है।
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सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज 2018 तक तकनीकी विश्वविद्यालय कैंपस के रूप में संचालित हुआ। वर्ष 2018 में तत्कालीन वाइस चांसलर, प्रोफेसर और सचिव की बैठक हुई थी जिसमें नन्हीं परी सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज (एसआईटी) को एआईसीटीई कॉलेज की मान्यता दिलाई गई। उस समय जमा किए गए शपथपत्र में दो साल में मड़धूरा में एसआईटी कॉलेज का निर्माण पूरा कर लेने की बात कही गई। इस आधार पर कॉलेज को दो सालों के लिए मान्यता मिल गई।
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वर्ष 2020 कोविड काल में मड़धूरा में बनाए गए कॉलेज भवन के निरीक्षण की अनुमति मिलने के बाद एआईसीटीई की वेबसाइट में नए कॉलेज भवन का फोटो अपलोड करने पर इसे फिर मान्यता मिल गई जबकि अब तक भवन का निर्माण पूरा नहीं हुआ है। भवन का निर्माण कार्य विवादों से घिरा होने के कारण वर्ष 2022 में एआईसीटीई की मान्यता के लिए आवेदन नहीं हो पा रहा है जिससे छात्र-छात्राएं परेशान हैं।
भवन निर्माण में मिली थीं अनियमितताएं
पिथौरागढ़। पूर्व डीएम आनंद स्वरूप ने जब निर्माणाधीन इंजीनियरिंग कॉलेज का निरीक्षण किया था। तब निर्माण कार्यों में काफी अनियमितताएं मिली थीं जिसके बाद उन्होंने जांच कराकर कार्यदायी संस्था के अग्रिम भुगतान पर रोक लगा दी थी। तबसे निर्माण कार्य ठप पड़ा है। पिछले हिस्से से हो रहे भूस्खलन के कारण भवन को खतरा है। भवन का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है जिस कारण एआईसीटीई की मान्यता के लिए आवेदन नहीं हो पा रहा है। संवाद
वर्तमान में चलते हैं पांच ट्रेड
पिथौरागढ़। नन्हीं परी सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज में वर्तमान में पांच ट्रेड चलते हैं जिसमें सिविल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन, इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग और मेकेनिकल इंजीनियरिंग शामिल हैं। यहां वर्तमान में करीब 300 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। कॉलेज को एआईसीटीई की मान्यता जल्द नहीं मिली तो प्रवेश सत्र शून्य हो सकता है। संवाद
केएनयूजीआईसी में नए कॉलेज के निर्माण की चल रही है तैयारी
पिथौरागढ़। मड़धूरा में इंजीनियरिंग कॉलेज के नाम पर बनाए गए भवन को स्टेट डिजास्टर फोर्स को देने की तैयारी चल रही है। साथ ही कॉलेज के भवन निर्माण के लिए केएनयू जीआईसी में भूमि इंजीनियरिंग कॉलेज के नाम हस्तांतरित करने की कार्रवाई चल रही है जिसका कई संगठन विरोध कर रहे हैं। संवाद

सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज पिथौरागढ़ में छात्र-छात्राओं को प्रथम वर्ष में प्रवेश मिले इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही पत्राचार किया गया है। -डॉ. आशीष चौहान, डीएम पिथौरागढ़, निदेशक इंजीनियरिंग कॉलेज पिथौरागढ़।
एआईसीटीई से मान्यता के संबंध में प्रतिनिधिमंडल दिल्ली भेजा गया है। जल्दी ही इस पर निर्णय लिया जाएगा।
-हेमंत कुमार जोशी कुलसचिव।
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