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राज्य गठन के बाद 81 परिवारों ने छोड़ा गांव
ब्यूरो/अमर उजाला, थल
Updated Wed, 18 Jan 2017 10:59 PM IST
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थल के लेजम गांव में पलायन के कारण वीरान पड़ी बाखली
- फोटो : अमर उजाला
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लेजम ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले चार गांवों से राज्य गठन के बाद 81 परिवार देश के विभिन्न शहरों में जाकर बस गए हैं। इस ग्राम पंचायत का खितोली गांव तो लगभग खाली हो चुका है। गांव में अब सिर्फ दो परिवार बचे हुए हैं।
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लेजम ग्राम पंचायत में कौली, भनारकोट, खितोली और लेजम गांव आते हैं। 1999 में यूपी के शासन में गांव के लिए सड़क तो बन गई थी लेकिन यह सड़क अब तक पक्की नहीं हो पाई है। गांव में सबसे बड़ी समस्या शिक्षा, चिकित्सा और रोजगार की है। गांव के लोगों को साधारण बीमारी के लिए भी पांच किलोमीटर थल आना पड़ता है। गांव में सरकारी स्कूल तो है लेकिन उनमें शिक्षकों की कमी है। लेजम ग्राम पंचायत के कौली गांव से 2008 में लोगों के जाने का क्रम शुरू हुआ। ज्यादातर नौकरी पेशा लोग दिल्ली, खटीमा, देहरादून, लखनऊ, पिथौरागढ़ जाकर बस गए।
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इस गांव में पहले 60 परिवार थे, अब मात्र 20 ही परिवार गांव में रह गए हैं। भनारकोट गांव में रहने वाले 14 परिवारों में से चार परिवार गांव छोड़ चुके हैं। लेजम गांव के 37 परिवारों में से 25 परिवारों ने गांव को छोड़ दिया है। गांव के कई अन्य लोग वहां से जाने की तैयारी में हैं। इन चारों गांवों में पहले 125 परिवार रहते थे, अब तक 81 परिवार वहां से जा चुके हैं। लेजम की ग्राम प्रधान नीमा देवी का कहना है कि गांव में शिक्षा, चिकित्सा की कोई सुविधा नहीं है।
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समस्या हल करने के प्रयास होंगे
विधायक नारायण राम आर्य लेजम जाने वाली सड़क पर डामरीकरण का प्रस्ताव तैयार किया गया है। गांव में एएनएम सेंटर खोला जाएगा और स्कूलों की दशा सुधारी जाएगी।