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पैदल पुल से जान जोखिम में डाल हो रही आवाजाही
Updated Thu, 24 May 2018 11:32 PM IST
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धारचूला (पिथौरागढ़)। कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर बुधवार सुबह लखनपुर एवं नजंग में बने लकड़ी के पुल के बहने के बाद से लोग जान जोखिम मेें डाल कर मलबों के ऊपर से जाने को मजबूर हैं।
व्यास घाटी के बूंदी, गर्ब्यांग, छांगरू तिंकर, नपलच्यू, गुंजी, रौंगकांग, नाबी, कुटी सहित सेना के अग्रिम चौकियों के लिए यह लोग सीमा सड़क संगठन के पूर्व में किए गए विस्फोटों से गिरे बोल्डरों एवं मलबों से होते हुए आवाजाही कर रहे हैं। खच्चर मजदूर कल्याण समिति और भारत-चीन व्यापार समिति ने लखनपुर में भारत से होते हुए नजंग तक पैदल रास्ता खोलने की मांग की हैं।
लोगों ने सड़क की निमार्णदायी संस्था की लेट-लतीफी पर भी नाराजगी जताई है। हालात यह हैं कि कई लोग मालपा से काली नदी पार कर नेपाल होते हुए गर्बाधार पार दुम्लिंग से भारत में प्रवेश कर आवाजाही करने को मजबूर हैं। जानवरों का चलना फिलहाल बंद हो चुका है। इस कारण भारत-चीन व्यापारियों के सामान ढुलान कार्य प्रभावित हो रही हैं।
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तहसीलदार ललित मोहन तिवाड़ी ने राजस्व दल को मौके का मुआयना कर घोड़े-खच्चरों के लायक रास्ता बनाने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन की ओर से सड़क निर्माण में लगी कंपनी को फिलहाल पैदल मार्ग खोलने को कहा गया है।
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व्यास घाटी के बूंदी, गर्ब्यांग, छांगरू तिंकर, नपलच्यू, गुंजी, रौंगकांग, नाबी, कुटी सहित सेना के अग्रिम चौकियों के लिए यह लोग सीमा सड़क संगठन के पूर्व में किए गए विस्फोटों से गिरे बोल्डरों एवं मलबों से होते हुए आवाजाही कर रहे हैं। खच्चर मजदूर कल्याण समिति और भारत-चीन व्यापार समिति ने लखनपुर में भारत से होते हुए नजंग तक पैदल रास्ता खोलने की मांग की हैं।
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लोगों ने सड़क की निमार्णदायी संस्था की लेट-लतीफी पर भी नाराजगी जताई है। हालात यह हैं कि कई लोग मालपा से काली नदी पार कर नेपाल होते हुए गर्बाधार पार दुम्लिंग से भारत में प्रवेश कर आवाजाही करने को मजबूर हैं। जानवरों का चलना फिलहाल बंद हो चुका है। इस कारण भारत-चीन व्यापारियों के सामान ढुलान कार्य प्रभावित हो रही हैं।
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तहसीलदार ललित मोहन तिवाड़ी ने राजस्व दल को मौके का मुआयना कर घोड़े-खच्चरों के लायक रास्ता बनाने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन की ओर से सड़क निर्माण में लगी कंपनी को फिलहाल पैदल मार्ग खोलने को कहा गया है।