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18 निस्तारण क्षेत्र बने, फिर भी इधर-उधर डाल रहे मलबा

Fri, 08 Dec 2017 10:30 PM IST
कालिका रावल/अमर उजाला, पिथौरागढ़
कालिका रावल/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Fri, 08 Dec 2017 10:30 PM IST
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18 turned out to be a drainage area, yet wreck havoc
घाट के पास डंपिंग जोन से अन्यत्र डाला जा रहा मलबा - फोटो : अमर उजाला

बारहमासी सड़क बनाने में मानकों का पूरा पालन कराया गया तो यह सड़क सीमांत जिले के लोगों के लिए लाभकारी साबित होगी, लेकिन शुरुआती दौर में ही सड़क विस्तारीकरण का काम कर रही कंपनी पर सवाल उठने लगे हैं। मलबा निस्तारण क्षेत्र (डंपिंग जोन) से हटकर मलबा डालकर जहां एक ओर वनस्पति को बर्बाद किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार को भी चूना लगाया जा रहा है, जबकि ठेकेदार को डंपिंग जोन में मलबा डालने का भुगतान किया जाता है।

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लोनिवि के राष्ट्रीय राजमार्ग डिवीजन, वन और सड़क का निर्माण कर रही कंपनी के अधिकारियों ने संयुक्त निरीक्षण के बाद घाट से पिथौरागढ़ तक 36 किमी के दायरे में 18 डंपिंग जोन बनाए हैं। घाट पुल के पास गोगना वन पंचायत की भूमि पर 70 गुणा 20 मीटर का पहला डंपिंग जोन है। 70 गुणा 10 और 60 गुणा 10 के दो डंपिंग जोन इसी इलाके में हैं। 150 गुणा 20 मीटर, 100 गुणा 14 मीटर के दो डंपिंग जोन मीनाबाजार के पास हैं। इस वन पंचायत में पिंडस्थल के पास 140 गुणा 8 और 135 गुणा 30 मीटर के डंपिंग जोन हैं। गुरना आरक्षित वन क्षेत्र में 70 गुणा 20, 60 गुणा 8, 45 गुणा 10, 42 गुणा 10, 35 गुणा 7, 40 गुणा 10, 45 गुणा 10, 75 गुणा 10 मीटर के मलबा निस्तारण क्षेत्र बनाया गया है। तोली वन पंचायत में 70 गुणा 15, 70 गुणा 10 मीटर और सिविल भूमि पर 40 गुणा 10 मीटर का डंपिंग जोन है।
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घाट से पिथौरागढ़ की ओर सड़क चौड़ीकरण से निकले मलबे को डंपिंग जोन से हटकर डालने से वनस्पतियों को गंभीर नुकसान पहुंचाया जा रहा है। ऐसा नहीं है कि डंपिंग जोनों पर मलबा नहीं डाला जा रहा है, लेकिन डंपिंग जोन से इतर भी खुलेआम मलबा डाला जा रहा है।
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डीएम, मंत्री के आदेशों का असर होता नहीं दिख रहा
डंपिंग जोन से हटकर मलबा डालने पर कार्रवाई करने की बात डीएम सी रविशंकर ने कही है। बृहस्पतिवार को केंद्रीय कपड़ा राज्यमंत्री अजय टम्टा ने डंपिंग जोन से बाहर मलबा नहीं डालने के निर्देश दिए, लेकिन 24 घंटे बाद भी मंत्री के निर्देश पर अमल नहीं हुआ है। शुक्रवार को घाट से पीछे मीना बाजार के पास डंपिंग जोन से हटकर मलबा डालने का मामला अमर उजाला ने पकड़ा। मीना बाजार में डंपिंग जोन से 30 मीटर आगे मलबा सड़क से नीचे डाला जा रहा था। लगभग हर जगह सड़क से नीचे मलबा लुढ़काया गया है। घाट से पिथौरागढ़ तक 18 डंपिंग जोन बनाने के बाद भी डंपिंग जोन में मलबा न डालना मनमानी को दर्शाता है।

जाम से लोग परेशान
सड़क का चौड़ीकरण हो रहा है, ऐसे में लोगों को कम से कम दिक्कत हो, इसका ध्यान निर्माण कार्य कर रही कंपनी के साथ ही संबंधित महकमे और प्रशासनिक तंत्र को भी देखना चाहिए, लेकिन सड़क चौड़ीकरण के कारण घाट से गुरना तक 25 किमी के दायरे पर कई स्थानों पर घंटों जाम लग रहा है। हालांकि, घाट से पिथौरागढ़ तक की सड़क गंगोलीहाट के साथ ही लोहाघाट, चंपावत के लोगों की भी जीवन रेखा मानी जाती है। स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने के लिए लोगों को जिला मुख्यालय आना पड़ता है। कार्यदायी संस्था रात में भी इस सड़क का काम करने की बात कह रही है, ऐसे में कार्यदायी संस्था को इस बात का ध्यान रखना होगा कि गंभीर रूप से बीमार लोगों और गर्भवती महिलाओं के जीवन पर यातायात बंदी का कोई विपरीत असर न पड़े।


निस्तारण क्षेत्र में मलबा फेंकने का भुगतान होता है। बावजूद इसके मलबा इधर-उधर फेंककर धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। इस मामले में वित्तीय अनियमितता के तहत कार्रवाई होगी। कार्यदायी संस्था से निजी और सरकारी संपत्ति के नुकसान का मुआवजा लिया जाएगा। जगह-जगह मलबा डालने से आपदा की स्थिति पैदा होगी। इसके लिए भी कार्यदायी संस्था और ठेकेदार जिम्मेदार रहेंगे। एनएच के अधिकारियों को 10 दिन पहले इस संबंध में सूचित किया था। तीन दिन पहले एनएच के अधिशासी अभियंता को नोटिस भेजा गया है। अनियमितता कतई सहन नहीं की जाएगी। -सी रविशंकर, जिलाधिकारी।

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