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प्रसव पीड़ा से कराहती गर्भवती ने रैन बसेरे में जन्मी बच्ची

Sun, 27 Aug 2017 02:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी। 
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी।  Updated Sun, 27 Aug 2017 02:11 AM IST
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Pregnant pregnant woman from childbirth was born in Ran Basera
प्रसव पीड़ा से कराहती गर्भवती ने रैन बसेरे में जन्मी बच्ची - फोटो : अमर उजाला

डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल की अव्यवस्थाएं और स्टाफ की लापरवाही एक बार फिर गर्भवती के लिए भारी पड़ गई। डॉक्टरों ने ऑपरेशन की बात कहकर उसके परिवार वालों को डरा दिया। गर्भवती रातभर रैन बसेरे में प्रसव पीड़ा से कराहती रही।

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सुबह सात बजे उसने वहीं बच्ची को जन्म दे दिया। इसके बाद स्टाफ ने उसे भर्ती कराने से मना कर दिया। ग्रामीणों ने जब हंगामा किया तब ढाई घंटे बाद महिला और नवजात को इलाज मिल सका। 
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 ओखलकांडा के दूरस्थ गांव पटरानी निवासी चंदन राम की गर्भवती पत्नी विद्या देवी (28 वर्ष) की शुक्रवार दोपहर बाद अचानक हालत बिगड़ गई। घर वालों ने उसे हल्द्वानी लाने के लिए 108 एंबुलेंस सेवा को फोन किया तो वहां से जवाब आया कि पहुंचने में करीब ढाई घंटा लगेगा।
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इसके बाद परिजन उसे गांव के पैदल मार्ग से सात किलोमीटर तक डोली से सड़क मार्ग पर पहुंच गए लेकिन तब तक 108 सेवा वहां नहीं पहुंची। 108 सेवा को फिर फोन किया तो उधर से उत्तर मिला कि अभी देर लगेगी। महिला की दर्द से कराह रही थी। घर वालों ने किराये की टैक्सी की और उसे लेकर हल्द्वानी पहुंच गए।

विद्या देवी को महिला अस्पताल ले जाया गया जहां से सुशीला तिवारी रैफर कर दिया गया। रात करीब 11 बजे घर वाले गर्भवती को लेकर एसटीएच पहुंचे तो वहां इमरजेंसी में देखने के बाद डॉक्टरों ने तुरंत ऑपरेशन की सलाह दे दी। चंदन राम के अनुसार उसने अनुरोध किया कि जल्दबाजी में ऑपरेशन के बजाय सुबह तक सामान्य डिलीवरी होने का इंतजार कर लें लेकिन डॉक्टर ऑपरेशन की बात पर अड़े रहे।

चंदन के ऑपरेशन कराने से मना करने पर गर्भवती को भर्ती भी नहीं कराया गया। रात अधिक हो जाने के कारण चंदन ने विद्या देवी को अस्पताल के रैनबसेरा में ही ठहरा दिया। 

शनिवार सुबह करीब सात बजे रैनबसेरा में विद्या ने बच्ची को जन्म दे दिया। चंदन राम का आरोप है कि उसने इमरजेंसी में जाकर भर्ती करने का अनुरोध किया तो स्टाफ ने मना कर दिया। अस्पताल में भर्ती न करने की सूचना मिलने पर ओखलकांडा ब्लाक के कनिष्ठ प्रमुख डिकर सिंह मेवाड़ी अस्पताल पहुंच गए।

इसके बाद परिजनों और गांव के लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। कनिष्ठ प्रमुख ने इस मामले की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एकेे पांडेय से शिकायत की तो उनके हस्तक्षेप पर करीब साढ़े नौ बजे विद्या देवी को अस्पताल में भर्ती किया जा सका। 


सुशीला तिवारी अस्पताल में इमरजेंसी के डॉक्टरों ने ऑपरेशन की बात कह कर अगर परिजनों को डराया न होता तो विद्या देवी को रैनबसेरा में बेटी को जन्म न देना पड़ता। जब सामान्य डिलीवरी हो सकती थी तो परिजनों को ऑपरेशन के लिए क्यों दबाव बनाया जा रहा था, ऐसे स्टाफ के खिलाफ अस्पताल प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए। 
- डिकर सिंह मेवाड़ी, कनिष्ठ प्रमुख ओखलकांडा ब्लाक

प्रसूता को भर्ती न किए जाने का मामला मेरी जानकारी में सुबह आया था। इस पर तत्काल प्रसूता को अस्पताल में भर्ती कराने की व्यवस्था की। 
- डॉ. एके पांडेय, चिकित्सा अधीक्षक एसटीएच

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