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प्रतिस्पर्धा के चक्कर में पहाड़ों की सड़कों पर दौड़ रहीं मौतें
Updated Wed, 14 Mar 2018 01:45 AM IST
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रामनगर में शोकाकुल परिजन
- फोटो : अमर उजाला
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रामनगर (नैनीताल)। संकरी और अंधे मोड़ों वाली सड़कों पर प्रतिस्पर्धा के चलते मौत दौड़ रही है। इस पर शासन, प्रशासन का भी कोई अंकुश नहीं है। इसी कारण पहाड़ों पर आए दिन सड़क हादसों में लोगों की जान जा रही है। मंगलवार को सल्ट अल्मोड़ा में खोईधार टोटाम के पास हुई बस दुर्घटना में 13 लोगों ने जान गंवाई तो 14 लोग घायल हुए। घायलों के मुताबिक जल्दी रामनगर पहुंचने की प्रतिस्पर्धा के कारण चालक तेज गति से बस चला रहा था। यही हादसे का कारण बना।
कुमाऊं, गढ़वाल का प्रवेशद्वार होने के चलते रामनगर से केमू, जीएमओ, यूजर्स, आदर्श, रोडवेज समेत चार-पांच कंपनियों की बसें चलती हैं। जीप, टैक्सियों से भी यात्रियों को लाया-ले जाया जाता है। मंगलवार को भी जीएमओ की दुर्घटनाग्रस्त सुपरफास्ट बस को सवा नौ बजे रामनगर पहुंचना था। देघाट से आने वाली केमो की बस को भी सुबह 9:45 बजे यहां पहुंचना होता है। रोडवेज की भी दो, तीन बसें रानीखेत आदि क्षेत्रों से इसी समय के आसपास पहुंचती हैं, जो यात्रियों को पहले बैठाने के फेर में तेज गति से दौड़ाई जाती हैं। यात्रियों को भी महानगर जाने के लिए करीब 10 बजे रामनगर पहुंचना होता है। दिल्ली जाने वाली बस के साथ ही ट्रेन व दूसरी गाड़ियों का समय भी लगभग यही है। पहाड़ से जल्द आने की इसी आपाधापी में पहाड़ों पर आए दिन सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। घायल उत्कर्षा बंगारी ने तहसीलदार प्रियंका रानी को बताया कि बस की गति तेज थी। दुर्घटना में घायल देघाट के दुकानदार ललित मोहन बंगारी ने भी यही कारण बताया।
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कुमाऊं, गढ़वाल का प्रवेशद्वार होने के चलते रामनगर से केमू, जीएमओ, यूजर्स, आदर्श, रोडवेज समेत चार-पांच कंपनियों की बसें चलती हैं। जीप, टैक्सियों से भी यात्रियों को लाया-ले जाया जाता है। मंगलवार को भी जीएमओ की दुर्घटनाग्रस्त सुपरफास्ट बस को सवा नौ बजे रामनगर पहुंचना था। देघाट से आने वाली केमो की बस को भी सुबह 9:45 बजे यहां पहुंचना होता है। रोडवेज की भी दो, तीन बसें रानीखेत आदि क्षेत्रों से इसी समय के आसपास पहुंचती हैं, जो यात्रियों को पहले बैठाने के फेर में तेज गति से दौड़ाई जाती हैं। यात्रियों को भी महानगर जाने के लिए करीब 10 बजे रामनगर पहुंचना होता है। दिल्ली जाने वाली बस के साथ ही ट्रेन व दूसरी गाड़ियों का समय भी लगभग यही है। पहाड़ से जल्द आने की इसी आपाधापी में पहाड़ों पर आए दिन सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। घायल उत्कर्षा बंगारी ने तहसीलदार प्रियंका रानी को बताया कि बस की गति तेज थी। दुर्घटना में घायल देघाट के दुकानदार ललित मोहन बंगारी ने भी यही कारण बताया।
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