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मंदिर के साधू का शव नहर में मिला
Updated Sat, 01 Sep 2018 01:58 AM IST
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छह साल के प्रिंस का शव
- फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी। पंचायतघर रोड के समीप चांदनी चौक बल्यूटिया शिवमंदिर के बुजुर्ग साधू का शव बृहस्पतिवार शाम नहर में मिला। ग्रामीणों को शक है कि साधू की नहर में गिरने से मौत हुई है। वर्षों पहले चोट लगने के कारण साधू की मानसिक हालत कमजोर हो गई थी।
पंचायतघर से करीब एक किलोमीटर दूर चांदनी चौक बल्यूटिया शिवमंदिर में नेपाल मूल के रहने वाले गोपाल सिंह (75) 25 सालों से मंदिर में पूजा पाठ कर रहे थे। बृहस्पतिवार शाम उनका शव मंदिर के समीप से गुजरने वाली नहर मेें पड़ा मिला। ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस ने मौके का मुआयना कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। ग्रामीणों को शक है कि पैर फिसलने के कारण साधू नहर में गिर गए होंगे और डूबने से उनकी मौत हो गई। इधर, टीपीनगर पुलिस का कहना है कि प्राथमिक तौर पर साधू की डूबने से मौत होना पाया गया है। गांव के तेज सिंह, राजन सिंह और हुकुम सिंह ने बताया कि पुजारी पर एक दशक पहले एक नशेड़ी ने हमला कर घायल कर दिया था। इसके बाद से उनकी मानसिक स्थिति कमजोर हो गई थी। गांव के प्रेम सिंह और रघुनाथ सिंह ने बताया कि पुजारी पर हमला करने वाले नशेड़ी को सांड़ ने दौड़ाकर मार डाला था। गांव के लोग मानते हैं कि पुजारी शिवभक्त थे। इसका प्रतिफल उसे भगवान शिव के गण ने ही दिया। पोस्टमार्टम के बाद ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से शव का अंतिम संस्कार किया।
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पंचायतघर से करीब एक किलोमीटर दूर चांदनी चौक बल्यूटिया शिवमंदिर में नेपाल मूल के रहने वाले गोपाल सिंह (75) 25 सालों से मंदिर में पूजा पाठ कर रहे थे। बृहस्पतिवार शाम उनका शव मंदिर के समीप से गुजरने वाली नहर मेें पड़ा मिला। ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस ने मौके का मुआयना कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। ग्रामीणों को शक है कि पैर फिसलने के कारण साधू नहर में गिर गए होंगे और डूबने से उनकी मौत हो गई। इधर, टीपीनगर पुलिस का कहना है कि प्राथमिक तौर पर साधू की डूबने से मौत होना पाया गया है। गांव के तेज सिंह, राजन सिंह और हुकुम सिंह ने बताया कि पुजारी पर एक दशक पहले एक नशेड़ी ने हमला कर घायल कर दिया था। इसके बाद से उनकी मानसिक स्थिति कमजोर हो गई थी। गांव के प्रेम सिंह और रघुनाथ सिंह ने बताया कि पुजारी पर हमला करने वाले नशेड़ी को सांड़ ने दौड़ाकर मार डाला था। गांव के लोग मानते हैं कि पुजारी शिवभक्त थे। इसका प्रतिफल उसे भगवान शिव के गण ने ही दिया। पोस्टमार्टम के बाद ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से शव का अंतिम संस्कार किया।
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