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जांच रिपोर्ट संस्कृत विश्वविद्यालय में पहुंची
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Mon, 23 Nov 2015 11:45 PM IST
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हरिद्वार। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में हुए भर्ती घोटाले की जांच रिपोर्ट शासन की ओर से विश्वविद्यालय प्रशासन के पास भेज दी गई। कार्यपरिषद की बैठक बुलाने के लिए विश्वविद्यालय की ओर से राजभवन को पत्र भेजकर अनुमति मांगी गई है। कार्यपरिषद ने कार्रवाई की तो कई शिक्षकों और कर्मचारियों पर गाज गिर सकती है।
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विश्वविद्यालय में पांच साल पहले शिक्षकों, लिपिकों और कुछ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती की गई थी। 14 लोगों की भर्ती प्रक्रिया पर शुुरू से ही सवाल खड़े होते रहे हैं। कई शिकायतों पर बार बार जांच होती रही। एक बार फिर शासन की ओर से गढ़वाल कमिश्नर सीएस नपलच्याल ने मार्च 2015 में जांचकर रिपोर्ट सरकार को सौंपी। जांच रिपोर्ट सरकार की ओर से विश्वविद्यालय के कुलाधिपति होने के नाते जून में राज्यपाल डा. केके पॉल के पास भेजी गई। लेकिन राजभवन ने जांच रिपोर्ट यह कहते हुए जुलाई में सरकार को लौटा दी कि विश्वविद्यालय नियमावली के अनुसार कार्यपरिषद या फिर इस मामले में निर्णय करे। तब से जांच रिपोर्ट शासन के पास थी। चार महीने बाद आखिरकार जांच रिपोर्ट शासन ने विश्वविद्यालय में भेज दी। कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी ने इस बात की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि कार्यपरिषद की बैठक में जांच रिपोर्ट पर कार्यवाही की जाएगी। कार्य परिषद की बैठक बुलाने के लिए राज्यपाल को पत्र लिखकर अनुमति मांगी गई है।
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ये बताए जा रहे आरोप
ज्योतिष, बीएड और हिंदी एवं साहित्य आदि विषयों के लिए भर्ती किए गए शिक्षकों के योग्यता से अधिक गुणांक देने आरोप। वहीं साक्षात्कार में ज्यादा अंक देने के भी आरोप हैं। वहीं लेखाकार और वाहन चालकों के पदों की भर्ती में मनमानी किए जाने की बातें सामने आई। एक विषय के शिक्षक की पीएचडी भर्ती होने के बाद अवार्ड होना जबकि एक शिक्षक की पीएचडी उसके टीचिंग विषय से दूसरे विषय में होना की चर्चा है। गुण विषयक और अनुभव के अंक भी ज्यादा दिए जाने के बातें सामने आ रही हैं।
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अपने आप कैसे करेंगे कार्यवाही का समर्थन
सुनने में आ रहा है कि जांच रिपोर्ट में जिन लोगों पर आरोप लगाए हैं। उनमें से कुछ विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद में भी शामिल हैं। विश्वविद्यालय में इस तरह की चर्चा रही है कि ऐसे में अपने ऊपर किस तरह कोई कार्यवाही किए जाने का समर्थन करेगा।
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जिन लोगों के नाम जांच रिपोर्ट में शामिल होंगे और उनपर आरोप लगे होंगे। ऐसे लोगों को कार्यपरिषद की बैठक में नहीं बैठने दिया जाएगा। जांच रिपोर्ट पर निष्पक्ष रुप से कार्रवाई की जाएगी।
-डा. महावीर अग्रवाल, कुलपति उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय एवं अध्यक्ष कार्यपरिषद।